नजफगढ़ में संतों का भव्य समागम, सनातन किन्नर अखाड़ा ने नववर्ष पर किया गुरु पर्व का आयोजन

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March 15, 2026

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-नजफगढ़ वेंकटेश्वर देवस्थान में मनाया गुरु पर्व

नई दिल्ली/नजफगढ़/उमा सक्सेना/-       नववर्ष के पावन अवसर पर सनातन किन्नर अखाड़ा द्वारा नजफगढ़ स्थित वेंकटेश्वर देवस्थानम में भव्य गुरु पर्व एवं नववर्ष समारोह का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में देशभर से साधु-संतों का जमावड़ा देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन धर्म की मजबूती, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा।

साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति, दादी महाराज और कंप्यूटर बाबा रहे आकर्षण का केंद्र
इस विशेष अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित संत-महात्माओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम में दादी महाराज की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया, वहीं कंप्यूटर बाबा भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण बने। संतों ने अपने प्रवचनों के माध्यम से सनातन धर्म की मूल भावना, परंपराओं और सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डाला।

किन्नर समाज का सनातन धर्म के प्रति समर्पण सराहनीय: दादी महाराज
कार्यक्रम के दौरान दादी महाराज ने वेंकटेश्वर देवस्थानम का भ्रमण किया और किन्नर समाज की भूमिका की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि किन्नर समाज जिस निष्ठा और समर्पण के साथ सनातन धर्म को सशक्त करने में जुटा है, वह वास्तव में प्रशंसनीय है। आज वेंकटेश्वर देवस्थानम इस बात का साक्षी है कि किन्नर समाज धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

सनातन को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास: महामंडलेश्वर दयालपुरी महाराज
सनातन किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर दयालपुरी महाराज जी ने अपने संबोधन में कहा कि अखाड़ा सनातन धर्म की रक्षा, प्रचार और प्रसार के लिए हर संभव प्रयास करता रहेगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि भविष्य में गौ को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के लिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनके अनुसार, गौ-संरक्षण सनातन संस्कृति की आत्मा है और इसे राष्ट्रीय पहचान मिलनी चाहिए।

आध्यात्मिकता, सामाजिक चेतना और एकता का संदेश
नववर्ष और गुरु पर्व के इस आयोजन ने आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश दिया। श्रद्धालुओं और संतों की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि सनातन किन्नर अखाड़ा न केवल धार्मिक गतिविधियों में, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

यह आयोजन नववर्ष की शुरुआत में सनातन धर्म के प्रति नए संकल्प, ऊर्जा और प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया।

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