Education for Bharat: डिजिटल शिक्षा को जमीन तक ले जाने पर हुआ मंथन

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 14, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-तकनीक को ‘भारत-फर्स्ट’ नजरिए से देखने की जरूरत

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- ‘एजुकेशन फॉर भारत–2025’ कॉन्क्लेव की शुरुआत शनिवार को दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में हुई। पहले सत्र में देश में बढ़ते डिजिटल गैप और शिक्षा में एडटेक मॉडल की भूमिका पर गहन चर्चा की गई। शिक्षा विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि भारत में डिजिटल शिक्षा तभी सफल हो सकती है, जब इसे केवल मनोरंजन के साधन के रूप में नहीं, बल्कि छात्रों के हित में और ‘भारत-फर्स्ट’ सोच के साथ विकसित किया जाए।

शिक्षा में प्रगति के बावजूद अभी लंबा सफर

पैनल चर्चा के दौरान रयान इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल सुधा सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के जरिये भारत ने कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने माना कि भले ही अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है, लेकिन देश इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। तकनीक ने शैक्षणिक प्रक्रिया को आसान और व्यापक बनाया है, जिससे अधिक छात्रों तक शिक्षा पहुंचाने का रास्ता खुला है।

तकनीक केवल मनोरंजन नहीं, छात्र-हितैषी हो

डीपीएस मथुरा रोड के प्रिंसिपल डॉ. राम सिंह ने तकनीक के सही और जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक को ‘देश प्रथम’ की भावना के साथ अपनाना चाहिए। इसे सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रखकर ऐसा बनाया जाना जरूरी है, जिससे छात्रों की सीखने की प्रक्रिया मजबूत हो और शिक्षण अधिक प्रभावी बन सके।

हर भाषा और हर बच्चे तक पहुंचे डिजिटल शिक्षा

डॉ. राम सिंह ने कहा कि तकनीक आज शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा समाधान बनकर उभरी है। अगर चुनौतियों वाले क्षेत्रों तक तकनीक पहुंचाई जाए, तो टीचिंग और लर्निंग की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हो सकता है। उन्होंने जोर दिया कि डिजिटल संसाधन हर भाषा में उपलब्ध हों, ताकि देश का हर बच्चा इसका लाभ उठा सके। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और तकनीकी तैयारी (रीडिनेस) को मजबूत करना जरूरी है।

डिजिटल खाई पाटने पर रहा फोकस

कॉन्क्लेव के पहले सत्र में यह साफ संदेश निकलकर आया कि शिक्षा में डिजिटल खाई को पाटने के लिए एक समावेशी और छात्र-केंद्रित एडटेक मॉडल आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तकनीक को सही रणनीति के साथ लागू किया जाए, तो यह न केवल शिक्षा की पहुंच बढ़ाएगी, बल्कि सीखने के तरीकों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox