
मानसी शर्मा /- लद्दाख के लेह में हालिया हिंसा के मामले में जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने सरकार की कार्रवाई पर कड़ा बयान दिया है। वांगचुक ने गृह मंत्रालय की ओर से उन्हें हिंसा का जिम्मेदार ठहराने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार बलि का बकरा तलाश रही है, जबकि असली समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है।
सोनम वांगचुक ने दी चेतावनी
वांगचुक ने कहा, “मैं देख रहा हूं कि पीएसए के तहत मुझे दो साल के लिए जेल भेजने की तैयारी हो रही है। मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन याद रखिए, जेल में सोनम वांगचुक सरकार के लिए बाहर के वांगचुक से कहीं ज्यादा परेशानी का कारण बन सकता है।”
हिंसा की असली वजह
उन्होंने हिंसा की जड़ युवाओं की नाराजगी और लंबे समय से अनदेखी की जा रही मांगों को बताया। वांगचुक ने कहा कि छह साल से बेरोजगारी और अधूरे वादों ने युवाओं का धैर्य खत्म कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंशिक आरक्षण का दिखावा कर रही है, जबकि युवाओं की प्रमुख मांग—राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का विस्तार—अब भी अधूरा है।
वांगचुक ने यह भी कहा कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाकर दोषारोपण की राजनीति कर रही है, जो शांति स्थापित करने के बजाय हालात को और भी जटिल बना रही है।





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