संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी के बावजूद भारत दौरे पर तालिबानी विदेश मंत्री?

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संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी के बावजूद भारत दौरे पर तालिबानी विदेश मंत्री?

-अफगानिस्तान के तालिबान शासन के विदेश मंत्री की भारत यात्रा पर उठे सवाल -यूएन के प्रतिबंधों के बीच संभावित रास्तों की पड़ताल

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  अफगानिस्तान में तालिबान सरकार में विदेश मंत्री भारत आने की योजना बना रहे हैं। खास बात है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरफ से अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी पर यात्रा प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में सवाल है कि इस बैन के साथ वह भारत की यात्रा पर कैसे आएंगे। केंद्र सरकार की तरफ से उनकी मेजबानी के प्रयासों के बीच, तालिबान ने भारत के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत का समर्थन किया है। मुत्ताकी की जल्द यात्रा के लिए भारत तालिबान के संपर्क में है।

तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख और कतर में अफगान राजदूत, सुहैल शाहीन ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को बेहतर बनाने की जरूरत है। शाहीन ने कहा कि इसके लिए विदेश मंत्री स्तर की यात्राओं की जरूरत है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार समेत सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। शाहीन ने इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र से अफगानिस्तान की सीट तालिबान के नेतृत्व वाले इस्लामिक अमीरात को देने का आग्रह किया था।

भारत कर सकता है यूएन से अनुरोध
मुत्ताकी की यात्रा की तारीखें तय होने के बाद, भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मुत्तकी पर लगे यात्रा प्रतिबंध को हटाने का अनुरोध कर सकता है ताकि उन्हें देश की यात्रा करने की अनुमति मिल सके। अफगान मीडिया ने पिछले महीने के अंत में बताया था कि सुरक्षा परिषद द्वारा उन्हें छूट देने से इनकार करने के बाद उनकी यात्रा रद्द कर दी गई थी। हालांकि, पता चला है कि पिछले सप्ताह अगस्त में मुत्तकी की यात्रा की तारीखों पर चर्चा हुई थी, लेकिन अंततः ये तय नहीं हो पाईं।

2021 के बाद पहली उच्चस्तरीय यात्रा होगी
टाइम्स ऑफ इंडिया ने 28 अगस्त को बताया था कि मुत्तकी जल्द ही भारत की यात्रा पर आ सकते हैं, जो अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद से अफगानिस्तान से भारत की पहली उच्चस्तरीय यात्रा होगी। पिछले कुछ वर्षों में तालिबान के साथ भारत के संबंधों में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है।

तालिबान भारत की निरंतर मानवीय सहायता की पूरी तरह से सराहना करता है, जो अफगान लोगों के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों और मित्रता के अनुरूप है। पिछले सप्ताह अफगानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप आने के बाद भारत ने और मानवीय सहायता भेजी। तालिबान की तरफ से भारत को दी गई सुरक्षा गारंटी में कोई कमी नहीं आई है।

इसके साथ ही तालिबान ने भारत को यह आश्वासन भी दिया है कि वह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए अफगानिस्तान का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। ऐसे में भारत का मानना है कि अब समय आ गया है कि वह देश में अपने प्रभाव को और बढ़ाए, भले ही मान्यता के मुद्दे पर वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ एकमत है।

भारत बढ़ा रहा तालिबान से संबंध
भारत ने तालिबान के साथ अपने संबंधों को पहले ही आगे बढ़ाना शुरू कर दिया था। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस साल दुबई में मुत्ताकी से मुलाकात की थी। साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनसे दो बार बात की थी। मुत्ताकी की यह यात्रा एक ऐतिहासिक घटना होगी, क्योंकि यह विकास साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने के भारत के इरादे का संकेत देगी। इसमें देश भर में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैली 500 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं।

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