हाईकोर्ट में जजों के चयन में कोटे पर विवाद

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August 15, 2026

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हाईकोर्ट में जजों के चयन में कोटे पर विवाद

-न्यायपालिका में आरक्षण पर जनहित याचिका

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम प्रणाली एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कोटा को लेकर है। एक नई जनहित याचिका में इस कोटे को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह ‘धर्मनिरपेक्षता’ के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ताओं का मानना है कि धर्म के आधार पर आरक्षण संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने SC से सरकार को धर्म के आधार पर सिफारिश किए गए लोगों को न्यायाधीश बनाने से रोकने का अनुरोध किया है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित है। SC का फैसला इस मामले में एक मिसाल कायम करेगा और भविष्य में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

याचिका में दिसंबर 2024 में लोकसभा में केंद्रीय कानून मंत्री के बयान का उल्लेख किया गया है। मंत्री ने कहा था कि ‘सरकार ने हाई के मुख्य न्यायाधीशों से SC, ST, OBC, अल्पसंख्यकों और महिलाओं से संबंधित उपयुक्त उम्मीदवारों के नाम SC कॉलेजियम को भेजने का अनुरोध किया है। ऐसा HC न्यायाधीशों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।’ याचिका में कहा गया है कि इस तरह का अनुरोध असंवैधानिक है क्योंकि संवैधानिक पदों पर चयन किसी व्यक्ति के धर्म के आधार पर नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब है कि याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सरकार का यह अनुरोध संविधान के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम क्या है?
यह CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश और दो सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक समूह है। कॉलेजियम का काम हाई कोर्ट के रूप में चुनने के लिए वकीलों के नामों की सिफारिश करना है। यह SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों के वकीलों के नामों की भी सिफारिश करता है।

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