ऑपरेशन सिंदूर से तिलमिलाए शहबाज, चीन में खोल दिया दर्द का पिटारा

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February 16, 2026

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ऑपरेशन सिंदूर से तिलमिलाए शहबाज, चीन में खोल दिया दर्द का पिटारा

-SCO की बैठक में भाग लेने पहुंचे शहबाज शरीफ

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने सिंधु जल समझौते और भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई बयान दिए और भारत पर दबाव डालने की कोशिश की, जो क्षेत्रीय कूटनीति और भारत-पाकिस्तान तनाव के संदर्भ में अहम हैं।

सिंधु जल समझौते पर शहबाज शरीफ का रुख
शहबाज शरीफ ने SCO शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty, 1960) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सभी SCO सदस्य देशों को मौजू संधियों का सम्मान करना चाहिए और पानी के उचित हिस्से की निर्बाध पहुंच को क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता के लिए आवश्यक बताया। उनके बयान में भारत पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश दिखी, विशेष रूप से तब जब भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में इस समझौते को निलंबित कर दिया था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संधियों का सम्मान सभी देशों को करना चाहिए और पाकिस्तान को उम्मीद है कि एससीओ सदस्य भी इस सिद्धांत का पालन करेंगे।

शहबाज शरीफ ने अपने बयान से यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत का समझौता निलंबित करने का फैसला क्षेत्रीय शांति के लिए हानिकारक है। हालांकि, उन्होंने भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन संदर्भ स्पष्ट था। शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान हमेशा बातचीत और कूटनीति का पक्षधर रहा है और वह टकराव के बजाय परामर्श को प्राथमिकता देता है।

ऑपरेशन सिंदूर पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी
ऑपरेशन सिंदूर, जो मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई थी, ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में इस ऑपरेशन का सीधा जिक्र करने से परहेज किया। लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसका दर्द उनके बयानों में झलका। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में क्षेत्र में ‘बेहद परेशान करने वाली घटनाएं’ हुई हैं, जिससे पाकिस्तान को “गहरा सदमा और निराशा” हुई है। यह स्पष्ट रूप से ऑपरेशन सिंदूर की ओर इशारा था, जिसमें भारत ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया था।

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