दो घंटे की बारिश में दिल्ली लकवाग्रस्त हो जाती है: CJI गवई की टिप्पणी से उठा बुनियादी ढांचे पर सवाल

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February 14, 2026

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दो घंटे की बारिश में दिल्ली लकवाग्रस्त हो जाती है: CJI गवई की टिप्पणी से उठा बुनियादी ढांचे पर सवाल

नई दिल्ली/अनीशा चौहान/-   भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई ने हाल ही में एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि “दो घंटे की बारिश में दिल्ली लकवाग्रस्त हो जाती है।” यह बयान सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केरल हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आया। उनकी यह टिप्पणी न केवल दिल्ली की बुनियादी ढांचे की खामियों को उजागर करती है, बल्कि देश की राजधानी में बारिश के बाद होने वाले जलभराव और ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

क्या है पूरा मामला?
18 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट में CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया शामिल थे, ने केरल के त्रिशूर जिले में NH-544 पर स्थित पलियेक्कारा टोल प्लाजा से संबंधित याचिका पर सुनवाई की।

केरल हाईकोर्ट ने इस हाईवे की खराब स्थिति को देखते हुए टोल वसूली पर रोक लगा दी थी। इस फैसले को NHAI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर बारिश से लगे ट्रैफिक जाम का जिक्र किया। इस पर CJI गवई ने कहा कि दिल्ली में तो दो घंटे की बारिश भी पूरे शहर को ठप कर देती है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष
सुनवाई के दौरान NHAI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि हाईवे पर 12 घंटे लंबा ट्रैफिक जाम इसलिए लगा क्योंकि वहां एक लॉरी पलट गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि “लॉरी अपने आप नहीं पलटी, सड़क पर गड्ढे की वजह से हादसा हुआ।”

तुषार मेहता ने आगे बताया कि जिन जगहों पर अंडरपास का काम चल रहा है, वहां NHAI ने वैकल्पिक सड़कों की व्यवस्था की है। लेकिन मानसून के कारण अंडरपास निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की चिंता
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि खराब सड़कें और लंबा जाम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण हैं। इससे पहले, 14 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से अनिच्छा जताते हुए सवाल उठाया था कि जब सड़कें ठीक हालत में ही नहीं हैं तो वहां से लोगों से टोल कैसे वसूला जा सकता है।

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