नजफगढ़ मैट्रों न्यूज/शिव कुमार यादव/- अध्यात्म योग संस्थान द्वारका नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉण् रमेश कुमार योगाचार्य ने रामनवमी
के शुभ अवसर पर वैदिक यज्ञ का आयोजन किया। जिसके अंदर उन्होंने कोरोना को भगाने के लिए औषधीय सामग्री के द्वारा अलग.अलग मंत्रों की आहुति दी ।
इस अवसर पर डॉ रमेश कुमार ने बताया कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद ने कहा कि ष्औषधीय सामग्री के द्वारा जो सुगन्धादि युक्त द्रव्य अग्नि में डाले जाते हैं उसके अणु अलग .अलग होके आकाश में रहते ही हैं ए इससे वह द्रव्य दुर्गन्ध आदि दोषों के निवारण करने वाला होता है । फिर उससे वायु की शुद्धि के होने से जगत् का बड़ा उपकार और सुख और आनंद की प्राप्ति होती है । इस कारण से यज्ञ को करना ही चाहिये । महर्षि दयानन्द ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका | पृ०५५ । ।

प्रतिदिन वैदिक यज्ञ करने से मानसिक शांतिए आध्यात्मिक शांति और भौतिक शांति प्राप्त होती है। मन एकाग्र होता है और हमारी शारीरिक और मानसिक कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है । स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। आरोग्यता प्रदान करने में यह बहुत उपयोगी है ।
यह बात बड़ी सुगमता से समझ में आ जायेगी। यदि रोग .उत्पत्ति के कारणों को जान लिया जाये और फिर विचार किया जाये कि यह यज्ञ किस प्रकार से उन कारणों को दूर करने में सहायक है। रोग दो प्रकार से उत्पन्न होता है। पहला हमारे शरीर सञ्चालन में अपने आप कोई गड़बड़ी होने पर, प्राण धारण वा जीवन- शक्ति न्यून होने पर, जिससे तनिक भी किसी रोग के कीटाणु का अक्रमण होने पर, ऋतु का परिवर्तन होने पर अथवा सर्दी.-गर्मी आदि के लगने पर मनुष्य रोग ग्रस्त हो जाये । हमारे शरीर में रोग के कृमि बहुत अधिक प्रवेश कर जायें, जिनका मुकाबला एक अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता रखने वाला मनुष्य भी नहीं कर सकता । ये कृमि वाय, जल, स्पर्श और अन्न आदि पदार्थों द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते हैं ।उन्होने कहा कि वैदिक यज्ञ करने से यज्ञ गैस श्वास के साथ फेफड़ों में जायेगी। वहाँ पर जो रक्त शुद्ध होने के लिये आता है उसमें यह गैस मिल जायेगी। इससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा और रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होगी ।
दूसरे कारण को दूर करने के लिये आवश्यक है कि वायु, जल, अन्न आदि पदार्थ शुद्ध हों। उनमें रोगों के कीटाणु रह ही न सकें और जो उनमें हो तो जल्दी मर जाए यह वैदिक यज्ञ से ही संभव है । उन्होने बताया कि वैदिक यज्ञ करने से वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है । आरोग्यता प्राप्त होती है और रोग दूर भागते हैं। हमारा यह दृढ़ निश्चय है कि अग्निहोत्र से शारीरिक और आत्मिक दोनों प्रकार की उन्नति हो जाती है । इन सब बातों से यह स्पष्ट है कि स्वास्थ्य वृद्धि के लिये अग्निहोत्र उपयोगी है । इससे कीटाणुओं का नाश होता है। हमारे शरीर की जीवन शक्ति बढ़ती है । अतः आरोग्य प्राप्त करने के लिये वैदिक यज्ञ बहुत उपयोगी है। हम सब को मिलकर अपने-अपने क्षेत्र मे वैदिक यज्ञ का आयोजन कर वातावरण को स्वच्छ व शुद्ध बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। इससे हमें कोरोना के वायरस को मारने मे भी मदद मिलेगी।


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