‘हमने आगाह किया था,’आयुष मंत्रालय ने SC में की पतंजलि की आलोचना

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October 9, 2026

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‘हमने आगाह किया था,’आयुष मंत्रालय ने SC में की पतंजलि की आलोचना

मानसी शर्मा / –  सुप्रीम कोर्ट में पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन के मामले में आयुष मंत्रालय ने एफिडेविट दाखिल किया है। इस एफिडेविट में आयुष मंत्रालय ने एलोपैथिक दवाओं को लेकर पतंजलि के बयानों की आलोचना की है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि लोगों के पास आयुष या एलोपैथिक दवाओं का लाभ उठाने का विकल्प है। आयुष मंत्रालय ने कहा है कि कोरोना महामारी के वक्त पतंजलि को कोरोनिल को वायरस के इलाज के रूप में प्रचारित करने के प्रति आगाह किया गया था। मंत्रालय ने पतंजलि को अनिवार्य परीक्षणों के संचालन के लिए आवश्यकताओं की याद दिलाई थी।

इसके साथ ही मंत्रालय ने चिकित्सा की जो विभिन्न प्रणाली हैं उनके बीच में आपसी सम्मान पर भी जोर दिया है। आयुष मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार की मौजूदा नीति जो है वो एलोपैथी के साथ आयुष प्रणालियों के एकीकरण के साथ एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के एक मॉडल की वकालत करती है। आयुष प्रणाली या एलोपैथिक चिकित्सा की सेवाओं का फायदा उठाना किसी व्यक्ति या स्वास्थ्य सेवा चाहने वाले की पसंद है।

‘पतंजलि को नोटिस जारी किया गया था’

उन्होंने कोर्ट को बताया कि कोरोनिल से जुड़े स्वास्थ्य मंत्रालय को तमाम आवेदन मिले, जिसके बाद पतंजलि को नोटिस जारी किया गया था। कंपनी से अनुरोध किया गया था कि जब तक मंत्रालय के द्वारा मामले की पूरी तरह से जांच नहीं कर ली जाती, तब तक वो कोरोना के खिलाफ कोरोनिल की प्रभावकारिता के बारे में दावों का विज्ञापन न करे। मंत्रालय ने एफिडेविट में कहा है कि सरकार अपने नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए प्रत्येक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की ताकत का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

पतंजलि ने मांगी थी माफी

बताते चलें, योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी थी। दोनों ने कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। हाल ही में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को समन भेजा था।

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