संस्कृत और देवनागरी के प्रचार में उत्कृष्ट योगदान पर प्रो. डॉ. मूल चन्द सम्मानित

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  
July 8, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि के संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं सतत योगदान के लिए राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू के संस्कृत विभागाध्यक्ष शिक्षाविद् प्रोफेसर (डॉ.) मूल चन्द को प्रतिष्ठित भारतेंदु हरिश्चंद्र अंतर्राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2026 से अलंकृत किया गया। यह सम्मान देवनागरी फाउंडेशन, भारत और अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के संयुक्त तत्वावधान में 15 जनवरी 2026 को आईटीओ स्थित राजेंद्र भवन, नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह के दौरान प्रदान किया गया।

अंतरराष्ट्रीय विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति
सम्मान समारोह में देश-विदेश से पधारे प्रख्यात विद्वानों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। इंडोनेशिया से आए मुख्य अतिथि रसाचार्य डॉ. आई. मेड धर्मयाशा सहित मानद कुलपति डॉ. सौरभ पांडेय, प्रो. देवेश कुमार मिश्रा (इग्नू, दिल्ली), एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के निदेशक डॉ. नारायण यादव (श्रीलंका) ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के आधिकारिक प्रतिनिधि प्रो. डॉ. जसवीर सिंह, अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद् श्री इंद्रजीत शर्मा (न्यूयॉर्क), अंतरराष्ट्रीय पत्रकार डॉ. शंभू पवार, डॉ. इस्लाम मलिक मवाना सहित अनेक प्रतिष्ठित अतिथि मौजूद रहे।

शैक्षणिक शोध और भाषा सेवा की सराहना
सम्मान प्रदान करते हुए वक्ताओं ने प्रो. डॉ. मूल चन्द के शैक्षणिक अनुसंधान, संस्कृत साहित्य के प्रति समर्पण और देवनागरी लिपि को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। अतिथियों ने कहा कि प्रो. डॉ. मूल चन्द का कार्य भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सम्मान को बताया सामूहिक उपलब्धि
सम्मान ग्रहण करते हुए प्रो. डॉ. मूल चन्द ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सभी संस्कृत साधकों और हिंदी-देवनागरी के सेवकों की सामूहिक सफलता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें भाषा और संस्कृति की सेवा में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा। राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू की प्राचार्या डॉ. मंजू शर्मा ने भी उन्हें बधाई देते हुए इसे महाविद्यालय परिवार के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

देवनागरी और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार-मंथन
कार्यक्रम के दौरान आयोजित संगोष्ठी में विद्वानों ने देवनागरी लिपि के ऐतिहासिक महत्व, वैश्विक संदर्भ में उसकी उपयोगिता और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर गहन चर्चा की। आयोजन का संचालन प्रभावशाली ढंग से किया गया और यह समारोह भाषा-संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित सभी प्रतिभागियों के लिए प्रेरणास्रोत बना।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox