जर्मनी में गांजा लेना वैध, घर में उगा सकेंगे पौधें

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जर्मनी में गांजा लेना वैध, घर में उगा सकेंगे पौधें

-भारत में भांग के ठेके, गांजा बैन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/फरीदाबाद/शिव कुमार यादव/- जर्मनी में गांजे की कालाबाजारी और ड्रग से जुड़े अपराधों पर लगाम के लिए मारियुआना यानी गांजे के इस्तेमाल और खेती को लीगल बनाने की शुरुआत कर दी है। यहां कैबिनेट ने बुधवार को गांजे से जुड़े बिल को मंजूरी दे दी। यानी जर्मन लोग अब गांजे का उपयोग और उसकी खेती कर सकेंगे। लेकिन वहीं भारत में भांग के ठेके है और इसका इस्तेमाल खुलेआम किया जा सकता है लेकिन गांजे पर पूरी तरह से बैन है।
                एक तरफ दुनियाभर के देश गांजे के उपयोग को वैध बना रहे हैं। वहीं भारत में 38 साल से इस पर बैन है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जब पश्चिमी देश इसे वैध बना रहे हैं तो भारत में यह गैर कानूनी क्यों है?

जर्मनी में गांजे को वैध बनाने की वजह जानिए
बर्लिन में जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री कार्ल लॉटरबैश ने कहा कि किसी को भी इस कानून का गलत मतलब नहीं समझना चाहिए। गांजा कानूनी हो जाएगा, लेकिन यह हानिकारक तो रहेगा ही। इस बिल का मकसद गांजे की कालाबाजारी और ड्रग से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाना है, ताकि हानिकारक चीजों का इस्तेमाल रोका जा सके। साथ ही इसके ग्राहकों की संख्या में भी कमी लाई जा सके।
               लॉटरबैश ने कहा कि बच्चों और युवाओं की सुरक्षा इस कानून का मुख्य उद्देश्य है। हालांकि, फिलहाल जो मसौदा है, उसमें बदलाव होने की उम्मीद है, क्योंकि संसद में इस पर बहस होगी। गर्मी की छुट्टियों के बाद संसद के दोनों सदन बिल पर विस्तृत चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इससे कालाबाजारी को कम करने में मदद मिलेगी। अवैध डीलर इससे खुश नहीं होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इसका मकसद है कि लोग उत्पाद की उचित जानकारी के बिना डीलरों से खरीदारी न करें। लोगों को खराब प्रोडक्ट और ड्रग से जुड़े अपराध से बचाने में मदद मिलेगी। लॉटरबैश ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि हम कोई समस्या पैदा नहीं कर रहे हैं। हम एक समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।

गांजा या भांग क्या होता है?
भांग और गांजे को अंग्रेजी में कैनाबीस, मारियुआना, वीड भी कहते हैं। इसमें टेट्राहाइड्रोकार्बनबिनोल पाया जाता है, जिसे आसान शब्दों में टीएचसी भी कहते हैं। इसे लेने के बाद अजीब सी खुशी महसूस होती है। खुशी पाने की बार-बार चाहत में लोग इसके आदी भी होने लगते हैं। गांजे के पौधे में तना, पत्ती, फल और बीज होता है। अक्सर लोग भांग और गांजा को एक समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक ही पौधे की प्रजाति के अलग-अलग रूप हैं। पौधे की नर प्रजाति को गांजा और मादा प्रजाति को भांग कहते हैं। गांजे में भांग के मुकाबले टीएचसी ज्यादा होता है।

नर प्रजाति वाले पौधे
नर पौधे लंबे होते हैं। इसमें कम पत्तियां और मोटा तना होता है। इसके फूल पूरे तने में होते हैं।

मादा प्रजाति वाले पौधे
मादा प्रजाति के पौधे नर के मुकाबले छोटे होते हैं। इसमें ज्यादा पत्तियां होती हैं। इसमें फूल ऊपरी हिस्से में होता है।

भारत में ड्रग्स के इस्तेमाल को लेकर क्या कानून है?
भारत में पहले गांजे का इस्तेमाल भी खुले तौर पर किया जा सकता था, लेकिन 1985 के बाद इस पर रोक लगा दी गई। सरकार ने 1985 में नारकोटिक ड्रग और साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट पास किया। इसके तहत नारकोटिक और साइकोट्रोपिक पदार्थ के प्रोडक्शन/खेती, सेल, खरीद, ट्रांसपोर्ट, स्टोर और कंजम्प्शन को बैन किया गया। 1985 में ये एक्ट लागू हुआ। इसमें कुल 6 चैप्टर और 83 सेक्शन हैं।
               एनडीपीएस एक्ट में भांग के पौधे के अलग-अलग भागों के इस्तेमाल को कानूनी और गैरकानूनी घोषित किया गया है। कानून में पौधे के फूल को गांजे के तौर पर परिभाषित किया गया है, जिसका इस्तेमाल एक अपराध है। इसी वजह से गांजे का इस्तेमाल भी गैरकानूनी है। कानून के उल्लंघन पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। 1 साल से लेकर 20 साल तक की सजा हो सकती है और 10 हजार से लेकर 2 लाख तक का जुर्माना भी हो सकता है। वहीं भारत में भांग का इस्तेमाल खुले तौर पर किया जा सकता है। हालांकि, कई राज्यों में यह सरकारी ठेकों पर भी मिलता है।

भारत में कहां-कहां पाया जाता है गांजे का पौधा?
भारत में यह पौधा हिमालय की तलहटी और आसपास के मैदानों में, पश्चिम में कश्मीर से लेकर पूर्व में असम तक पाया जाता है। वैसे तो ये एक जंगली पौधे के तौर पर पाया जाता है, लेकिन कॉमर्शियली भी इसका उत्पादन होता है।
               आमतौर पर अगस्त में बीज बोए जाते हैं। सितंबर के अंत तक जब पौधे 6-12 इंच के हो जाते हैं, तो इनकी रोपाई की जाती है। नवंबर तक पौधों की ट्रिमिंग कर निचली डालियों को काट दिया जाता है। गांजे के मेल और फीमेल प्लांट को अलग-अलग किया जाता है। जनवरी-फरवरी तक गांजा उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।

जर्मनी ही नहीं, इन देशों में भी आम लोग कर सकते हैं गांजे का उपयोग
ऑस्ट्रेलिया : ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र ने 2019 के अंत में गांजे को वैध बनाने के लिए एक कानून पारित किया। जनवरी 2020 में इस कानून के लागू होने के बाद कोई भी शख्स निजी उपयोग के लिए छोटी मात्रा में गांजा, भांग रख सकता है और उसे उगा सकता है।

अमेरिका : 37 राज्यों में डॉक्टर के प्रिस्क्राइब करने पर गांजे का उपयोग कर सकते हैं। वहीं 21 राज्यों में मनोरंजक कामों के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।

कनाडा : अक्टूबर 2018 में फेडरल कैनाबीस एक्ट आने के बाद से मारियुआना को कानूनी बना दिया। एक्ट के मुताबिक हर घर को केवल चार पौधे लगाने और हर एक शख्स 30 ग्राम गांजा ले सकता है।

कोलंबिया : 1994 में बने कानून के मुताबिक आम लोग आंशिक तौर पर गांजे का उपयोग कर सकते हैं।

जॉर्जिया : 30 जुलाई 2018 को जॉर्जिया की संवैधानिक कोर्ट के फैसले के बाद गांजे का मेडिकल और मनोरंजक उपयोग वैध कर दिया गया।

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