एलएसी पर गलवान और पैंगोंग में अचानक बढ़ी हलचल, एक्शन में आई इंडियन आर्मी

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August 25, 2026

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एलएसी पर गलवान और पैंगोंग में अचानक बढ़ी हलचल, एक्शन में आई इंडियन आर्मी

-जी-20 के बीच भारतीय सेना ने गलवान में घोड़ों व खच्चरों से किया सर्वेक्षण, पैंगोंग झील पर किया हाफ मैराथन का आयोजन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- एक तरफ राजधानी दिल्ली में जी-20 सम्मेलन की बैठकों का दौर चल रहा है और इसी दौरान चीनी विदेश मंत्री किन गांग और भारत के विदेश एस जयशंकर ने नई दिल्ली में जी-20 के इतर मुलाकात भी की है। जिसमें जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री के सामने कहा कि भारत और चीन के संबंध ‘असामान्य’ हैं। वहीं दूसरी तरफ लद्दाख में गलवान और पैंगोंग में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय सेना की टुकड़ियों ने अपनी गतिविधि बढ़ी दी है। सेना के जवानों ने एलएसी के आस-पास के इलाकों में घोड़ों और खच्चरों से सर्वेक्षण किया। इसके अलावा पैंगोंग झील पर हाफ मैराथन जैसी गतिविधियां कीं।
                 इससे पहले इंडियन आर्मी की ओर से तस्वीरें जारी की गई थीं, जिसमें भारत की सेना पूर्वी लद्दाख में क्रिकेट खेलती दिख रही है। पूर्वी लद्दाख में चीन और भारत के बीच गलवान में साल 2020 में टकराव हो गया था, जिसके बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया और लगातार तनाव बना हुआ है। दोनो देशों की सेनाएं कई मौकों पर एक-दूसरे के सामने आ चुकी हैं।
                 हालांकि, भारतीय सेना ने उस एरिया का खुलासा नहीं किया है, जहां जवान क्रिकेट खेल रहे हैं। लेह से ऑपरेट करने वाली इंडियन आर्मी की 14 कॉर्प्स ने ट्वीट किया, “पटियाला ब्रिगेड, त्रिशूल डिवीजन ने शून्य से नीचे तापमान में अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में पूरे उत्साह और जोश के साथ क्रिकेट मैच का आयोजन किया। हम असंभव को संभव बनाते हैं।
                 बता दें कि जिस स्थान पर भारतीय सेना क्रिकेट खेल रही है वह स्थान भारत और चीन की ओर से आमने-सामने के टकराव से बचने के लिए बनाए गए बफर जोन से अच्छी खासी दूरी पर है। दोनों देशों की सेनाओं से टकराव से बचने के लिए अपने अपने पोजिशन से 1.5 किलोमीटर पीछे हटने का फैसला किया और ये स्थान बफर जोन में तब्दील हो गया है। डियन आर्मी ने इस क्षेत्र में पहला कैंप 700 मीटर पीछे हटकर बनाया है। इसके बाद भारत की सेना का कैंप नंबर-2 और कैंप नंबर-3 है। ये कैंप लगभग समान दूरी पर मौजूद हैं ताकि चीनी गतिविधियों पर निगाह रखी जा सके।

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