टैक्स के नाम पर और कितना लुटा जाएगा हमें? – हिमांशु सेठी

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September 5, 2026

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टैक्स के नाम पर और कितना लुटा जाएगा हमें? – हिमांशु सेठी

- बड़े बड़े उद्योगपतियों के पास - इलेक्शन में, - करप्शन में, - विधायक खरीदने में, - उद्योगपतियों को बहार भागाने में, - नेताओं को मुफ्त सब्सिडी देने में, - नेताओं के लिए निजी ऐशो-आराम खरीदने में, - नेताओं को मुफ्त सिक्योरिटी देने में।

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- हम आम जनता को टैक्स के नाम पर ना जाने कितना लूटा जा रहा है। अमीर लोग तो इस टैक्स को आसानी से भर देते हैं, लेकिन गरीब जनता उनका क्या? वो तो इन टैक्स के बोझ तले दब जाते है उन्हे कभी इनकम टैक्स के नाम पर, कभी जी.इस.टी, कभी सेल्स टैक्स, कभी जुर्माने, कभी रिश्वत, कभी ब्याज़ के नाम पर लूटा जाता है। उदाहरण के तौर पर हमें कब, कहा और कैसे लूटा जाता हैँ समझते हैं-
        मैने नौकरी की उसके बदले मुझे सैलरी मिली उसपे इनकम टैक्स दिया, लाइसेंस बनवाया उसपे टैक्स दिया, कार खरीदी उसपे टैक्स दिया, रोड पे गाडी चलाई उसपे रोड टैक्स दिया, हाईवे पे गया तो टोल टैक्स दिया, कार की सर्विस कराई उसपे टैक्स दिया, अगर सडक पे कोई रूल तोड़ा तो उसपे जुर्माने के तौर पे टैक्स दिया, घर खरीदा उसपे टैक्स दिया, बिजली का बिल भरा तो टैक्स दिया, पानी का बिल दिया तो टैक्स दिया, हाउस रेंट के नाम पे टैक्स दिया, मोबाइल लिया उसपे टैक्स दिया, रिचार्ज करवाया उसपे टैक्स दिया, टेलीविज़न खरीदा उसपे टैक्स दिया, दी.टी.एच खरीदा उसपे टैक्स दिया, उसका रिचार्ज करवाया उसपे टैक्स दिया, और तो और रेस्टोरेंट में खाना खाया उसपे भी टैक्स दिया।

                   मॉल गया तो पार्किंग और पार्किंग पे टैक्स दिया, राशन, पानी, जूते, कपड़े, बच्चों की किताबे खरीदी उसपे टैक्स दिया, बच्चों का एडमिशन करवाया उसपे टैक्स दिया, बच्चों को झूला खिलाया उसपे भी टैक्स दिया, बीमार हुए तो हॉस्पिटल गये उसपे टैक्स दिया, दवाई खरीदी उसपे टैक्स दिया, इन्श्योरेंस करवाया उसपे भी टैक्स दिया, लोन लिया तो उसपे टैक्स दिया, ब्याज़ दिया उसपे टैक्स दिया। इसके बाद अगर गलती से कुछ बच गया तो इनकम टैक्स के नाम पर टैक्स दिया।

सब कुछ ठीक होता अगर पूरी उम्र काम करने के बाद जब हम लोग रिटायर होते तो हमें मिलती कोई सोशल सिक्योरिटी, इन्श्योरेंस, हेल्थ बेनीफिट, ट्रांसपोर्ट की सुविधा लेकिन हमें मिलता क्या हैँ – खराब हवा, आस-पास गन्दगी, सीवर की लाइन खराब, नालिया बंद, सडक पे आवारा पशु ऐसे ही  घुमते रहते हैँ, रोड टैक्स देने क बाद भी स्ट्रीट लाइट खराब, गड्ढे वाली सड़क जो लगता हैँ कि सड़क कम और गड्ढे ज़्यादा हैँ, कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं, फल और सब्ज़िया ज़हरीली, इलाज के लिए महंगे हॉस्पिटल, शिक्षा के लिए महंगे स्कूल, महंगाई अपनी चरम सीमा पर हैं तो हम लोगों का पैसे गया कहा?

आज ज़रूरत हैँ कुछ सवाल करने की, सवाल जो हमारे और हमारे बच्चों के भविषय से जुड़े हैँ, सवाल जिसका आधार हिन्दु-मुस्लिम ना होकर जन सुविधाएं होनी चाइये, सवाल जिनसे हम आम जन मानस को फ़ायदा मिले ना कि सिर्फ बड़े-बड़े उद्योगपतियों को।

अब कोशिश करते हैँ पता करने की के हमारा सारा पैसा जाता कहा हैँ –
– बड़े बड़े उद्योगपतियों के पास
– इलेक्शन में,
– करप्शन में,
– विधायक खरीदने में,
– उद्योगपतियों को बहार भागाने में,
– नेताओं को मुफ्त सब्सिडी देने में,
– नेताओं के लिए निजी ऐशो-आराम खरीदने में,
– नेताओं को मुफ्त सिक्योरिटी देने में।

आखिर कब तक जनता को ऐसे ही बेवकूफ बनाया जायेगा, उन्हे ऐसे ही लूटा जायेगा। बस अब वक़्त आ गया हैँ कि लोगों को उठना चाहिए और सवाल करना चाहिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार से।

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