देहरादून/- जोशीमठ में जिन 723 घरों में दरारें आई हैं, उनमें रहनेवालों को अभी सरकार की तरफ से डेढ़ लाख की मदद की जाएगी। 50 हजार शिफ्टिंग के लिए और मुआवजे के एडवांस के तौर पर एक लाख रुपए दिए जाएंगे। फिलहाल सरकार ने घरों को नही तोड़ने का फैसला लिया है अभी सिर्फ दो होटलों को ही तोड़ा जायेगा। स्थिति के आकलन के बाद फाइनल मुआवजा क्या होगा, ये बाद में तय किया जाएगा। एक हफ्ते में सर्वे पूरा होगा और उसके बाद ये मदद दी जाएगी।
प्रभावित परिवारों से बुधवार को बातचीत के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सचिव एम सुंदरम ने फैसलों की जानकारी मीडिया में दी। उन्होंने कहा कि अभी कोई घर नहीं तोड़ा जाएगा, केवल 2 होटल तोड़े जाएंगे। घरों पर लाल निशान उन्हें खाली करने के लिए लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि होटल मालिकों से भी बातचीत हो गई है, वे प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग के लिए राजी हैं।
फिलहाल लोग सड़कों पर विरोध कर रहे है। मीडिया से बात करते हुए पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने सरकार से बातचीत की बात स्वीकार की।

उन्होंने कहा- सरकार बद्रीनाथ जैसा मुआवजा देने को राजी नहीं है, वह मार्केट रेट पर मुआवजा देगी। हमने कहा कि रेट बता दीजिए और होटल गिरा दीजिए, उन्होंने रेट नहीं बताया। अब हम भी यहां से नहीं हटेंगे।
उत्तराखंड के टिहरी जिले के चंबा में मकानों में भी दरारें आ गई हैं। जोशीमठ के ऊपरी इलाकों में बारिश शुरू, बद्रीनाथ में बर्फबारी भी हो रही। होटल मलारी इन के सामने होटल मालिक का परिवार सड़क पर लेटकर प्रदर्शन कर रहा था। सचिव सुंदरम ने कहा कि इन लोगों से बातचीत हो गई है। चमोली कलेक्टर हिमांशु खुराना के मुताबिक कर्णप्रयाग के बहुगुणा में आईटी रुड़की की टीम स्टडी कर रही है। उनकी रिपोर्ट के बाद जरूरी कदम उठाएंगे। सीएम के सचिव आरएम सुंदरम ने बुधवार को जिला प्रशासन और जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके साथ बैठक की।
धरने पर बैठे थे होटल मालिक, कहा- सरकार हमें मरने के लिए छोड़ रही
मलारी इन के मालिक टी सिंह राणा का परिवार मुआवजे की मांग को लेकर होटल के बाहर बैठ गया था। एक और होटल संचालक लालमणि सेमवाल ने कहा था कि जब जोशीमठ से लोग पलायन कर रहे थे।

सुख-सुविधाएं नहीं थीं, तब यहां जीवन भर की पूंजी से ये होटल खड़ा किया। आज वक्त की गाज गिर रही है। सरकार हमें मरने के लिए छोड़ रही है।
हर साल धंस रहा जोशीमठ और आस-पास का इलाका
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग के दो साल की एक स्टडी में सामने आया कि जोशीमठ और इसके आसपास के क्षेत्र में हर साल 2.5 इंच की दर से जमीन धंस रही थी। देहरादून स्थित संस्थान द्वारा सैटेलाइट डेटा का उपयोग करते हुए यह अध्ययन किया गया है। जुलाई 2020 से मार्च 2022 तक जुटाई गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पूरा क्षेत्र धीरे-धीरे धंस रहा है। डेटा से पता चलता है कि धंसने वाला क्षेत्र पूरी घाटी में फैला हुआ है और जोशीमठ तक ही सीमित नहीं हैं।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि जोशीमठ में सूक्ष्म भूकंप अवलोकन प्रणाली स्थापित की जाएगी। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार से माइक्रो सीसमिक ऑब्जर्वेशन प्रणाली लगाने का काम शुरू हो जाएगा। जोशीमठ बेहद संवेदनशील भूकंप जोन 5 के तहत आता है। लगातार भूंकपीय तनाव बना रहता है।
स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट फोर्स इन होटलों को स्टेप-बाय-स्टेप गिराने की योजना पर काम कर रहा है। दोनों होटल झुक गए हैं। इन्हें हाथ से ही गिराया जाएगा। किसी विस्फोटक का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इन्हें गिराने का काम सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की की निगरानी में होगा। ब्ठत्प् के चीफ साइंटिस्ट डीपी कानूनगो ने कहा कि होटल को रिपेयर नहीं किया जा सकता। इसे गिराना ही पड़ेगा। लैंडस्लाइड से होटल के फाउंडेटशन पर असर पड़ा।
लोगों को सुरक्षित जगह पर जाने को कहा
एसडीआरएफ के कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने कहा कि सबसे पहले होटल का ऊपरी हिस्सा गिराया जाएगा। दोनों होटलों के आसपास मकान हैं, इसलिए इन्हें गिराना जरूरी है। होटल और ज्यादा धंसे तो गिर जाएंगे। ैक्त्थ् तैनात कर दी गई है। लाउडस्पीकर से लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा जा रहा है।
उत्तराखंड के डीजीपी ने कहा- अभी 678 इमारतें असुरक्षित हैं। ज्यादातर इमारतों को खाली करा लिया गया है। ये प्रक्रिया अभी जारी है। पूरे इलाके की साइंटिफिक स्टडी हो चुकी है और कुछ इलाकों को सील भी किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में 16 जनवरी को सुनवाई
इस मामले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सुप्रीम कोर्ट से अर्जेंट हियरिंग की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट 16 जनवरी को इस मामले की सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लोकतंत्र के जरिए चुने गए संस्थान है, जो इस मामले को देख रहे हैं। हर मामला हमारे पास लाना जरूरी नहीं।
दरार वाले मकान गिराने की सिफारिश
राज्य सरकार ने जोशीमठ को तीन जोन में बांटने का फैसला किया है। ये जोन होंगे- डेंजर, बफर और सेफ जोन। डेंजर जोन में ऐसे मकान होंगे जो ज्यादा जर्जर हैं और रहने लायक नहीं हैं। ऐसे मकानों को मैन्युअली गिराया जाएगा, जबकि सेफ जोन में वैसे घर होंगे जिनमें हल्की दरारें हैं और जिसके टूटने की आशंका बेहद कम है। बफर जोन में वो मकान होंगे, जिनमें हल्की दरारें हैं, लेकिन दरारों के बढ़ने का खतरा है। एक्सपर्ट्स की एक टीम दरार वाले मकानों को गिराने की सिफारिश कर चुकी है।
लैंडस्लाइड से हमारा कोई लेना-देना नहीं- एनटीपीसी
राज्य की पावर प्रोड्यूसर कंपनी एनटीपीसी ने कहा है कि तपोवन विष्णुगढ़ प्रोजेक्ट का जोशीमठ में हो रहे लैंडस्लाइड से कोई लेना-देना नहीं है। बता दें कि जोशीमठ लैंडस्लाइड के लिए एनटीपीसी के एक हाइड्रो प्रोजेक्ट को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एनटीपीसी के हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए सुरंग खोदी गई, जिस वजह से शहर धंस रहा है। हालांकि एनटीपीसी ने इन सब बातों को खारिज कर दिया है।
जोशीमठ के मकानों पर लाल क्रॉस
जोशीमठ के सिंधी गांधीनगर और मनोहर बाग एरिया डेंजर जोन में हैं। यहां के मकानों पर रेड क्रॉस लगाए गए हैं। प्रशासन ने इन मकानों को रहने लायक नहीं बताया है। चमोली क्ड हिमांशु खुराना ने बताया कि जोशीमठ और आसपास के इलाकों में कंस्ट्रक्शन बैन कर दिया गया है।
ज्यादातर लोग डर के चलते घर के बाहर ही रह रहे हैं। किराएदार भी लैंड स्लाइड के डर से घर छोड़कर चले गए हैं। अभी तक 70 परिवारों को वहां से हटाया गया है। बाकियों को हटाने का काम चल रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे रिलीफ कैंप में चले जाएं।
जोशीमठ में बनेगा अस्थायी पुनर्वास केंद्र, धामी ने कहा- डेंजर जोन को तत्काल खाली कराएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हाई लेवल मीटिंग में कहा कि सुरक्षित जगह पर यह पुनर्वास केंद्र बनाया जाए। साथ ही, उन्होंने डेंजर जोन को तत्काल खाली कराने के लिए कहा


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