ज्ञानवानी पर आया कोर्ट का फैसला, मामले को माना सुनवाई योग्य 

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 10, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

ज्ञानवानी पर आया कोर्ट का फैसला, मामले को माना सुनवाई योग्य 

-मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/वाराणसी/भावना शर्मा/- ज्ञानवापी मामले में आज कोर्ट ने एक बड़ा फैसला किया है, जिससे मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लग सकता है। जी हां, सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने किरन सिंह की याचिका को सुनवाई योग्य माना है। अब इस मामले पर सुनवाई आने वाले 2 दिसंबर को होगी।

                 अक्तूबर में ही इस मामले में दोनों पक्षों की सभी दलीलें पूरी हो चुकी थी। तभी से आदेश में पत्रावली लंबित थी। इस प्रकरण में वादिनी किरन सिंह की तरफ से मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित करने, परिसर हिंदुओं को सौंपने और शिवलिंग की पूजा-पाठ, राग-भोग की अनुमति मांगी गई थी। अब इस मामले को कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना है। हिंदू पक्ष के वकील अनुपम द्विवेदी ने बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी कोर्ट ने मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अगली तारीख पर तत्काल पूजा वाले प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होगी। गुरुवार को कोर्ट के आदेश के मद्देनजर अदालत परिसर में जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था रही। विश्व वैदिक सनातन संघ ने कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। 

                    वादिनी किरन सिंह के अधिवक्ताओं ने दलील में कहा था कि वाद सुनवाई योग्य है या नहीं, इस मुद्दे पर अंजुमन इंतजामिया की तरफ से जो आपत्ति उठाई गई है, वह साक्ष्य व ट्रायल का विषय है। ज्ञानवापी का गुंबद छोड़कर सब कुछ मंदिर का है जब ट्रायल होगा तभी पता चलेगा कि वह मस्जिद है या मंदिर। दीन मोहम्मद के फैसले के जिक्र पर कहा कि कोई हिंदू पक्षकार उस मुकदमे में नहीं था इसलिए हिंदू पक्ष पर लागू नहीं होता है। यह भी दलील दी कि विशेष धर्म स्थल विधेयक 1991 इस वाद में प्रभावी नहीं है। स्ट्रक्चर का पता नहीं कि मंदिर है या मस्जिद। जिसके ट्रायल का अधिकार सिविल कोर्ट को है। कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने और मस्जिद बनवाने का आदेश दिया था। वक्फ एक्ट हिन्दू पक्ष पर लागू नहीं होता है। ऐसे में यह वाद सुनवाई योग्य है और अन्जुमन की तरफ से पोषणीयता के बिंदु पर दिया गया आवेदन खारिज होने योग्य है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox