पारंपरिक पुरूष प्रधान समाज में अपारंपरिक महिला की यथार्थवादी कहानी है मीता की कहानी

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August 22, 2026

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पारंपरिक पुरूष प्रधान समाज में अपारंपरिक महिला की यथार्थवादी कहानी है मीता की कहानी

-चौथा आयाम प्रवीण कुमार द्वारा निर्देशित विजय तेंदुलकर की नाटक मीता की कहानी प्रस्तुत करता है

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- पारंपरिक पुरुष प्रधान समाज में अपरंपरागत महिलाओं के बीच मीता की कहानी एक ऐसी लड़की की कहानी है जो एक होने की चुनौतियों का सामना कर रही है।
                प्रख्यात मराठी द्वारा लिखित यथार्थवादी नाटक “मीता की कहानी“, नाटककार विजय तेंदुलकर जिसमें बापू एक लड़की की कहानी सुनाते है। दोस्त सुमित्रा उर्फ “मीता“ जो बचपन से लड़कों की तरह रही है। लड़कों के साथ रहने से उसका व्यवहार उनके जैसा हो गया है। इस बदली परिस्थिति में वह एक लड़की को पसंद करने लगती है। उसके लिए उसका प्यार/जुनून, लड़की/समान लिंग के परिणामस्वरूप समाज और परिवार से गलत प्रतिक्रिया व अपमान मिलता है। बाद में अप्रत्याशित गंभीर परिणाम …..

विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित व फोर्थ डाइमेशन के निर्देशक प्रवीण कुमार द्वारा निर्देशित मीता की कहानी को 14 मई को आई एच सी इंडिया हैबिटेट सैंटर लोधी रोड़ नई दिल्ली पर प्रदर्शित किया जा रहा है।

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