अब मुस्लिम महिलाऐं भी तलाकशुदा पति से ले पायेंगी गुजारा भत्ता- हाईकोर्ट

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August 25, 2026

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अब मुस्लिम महिलाऐं भी तलाकशुदा पति से ले पायेंगी गुजारा भत्ता- हाईकोर्ट

-इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम महिलाओं के हक में सुनाया बड़ा फैसला
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/उत्तर प्रदेश/भावना शर्मा/- तीन तलाक के बाद अब मुस्लिम महिलाओं को एक बार फिर कोर्ट की तरफ से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार को मुस्लिम महिलाओं के हक में बड़ा फैसला दिया है। अब तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं भी अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी होंगीं। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को भी धारा 125 के तहत पति से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है। वे इद्दत की अवधि के बाद भी इसे ले सकती हैं। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि तलाकशुदा महिलाओं को यह अधिकार तभी तक है, जब तक वे दूसरी शादी नहीं कर लेतीं।
                यह फैसला न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने रजिया के आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर दिया। साल 2008 में दाखिल इस याचिका में प्रतापगढ़ के एक सेशन कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया था। साथ ही कहा था कि मुस्लिम वीमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) एक्ट के आने के बाद याची और उसके पति का मामला इसी अधिनियम के अधीन होगा। सेशन कोर्ट ने कहा कि उक्त अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत ही मुस्लिम तलाकशुदा पत्नी गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी है। ऐसे मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 लागू नहीं होती।
                 हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट के इस फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के शबाना बानो मामले में दिए गए निर्णय के बाद यह तय हो चुका है कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला धारा 125 के तहत इद्दत की अवधि के बाद भी गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी है, जब तक वह दूसरी शादी नहीं कर लेती।
                 मुस्लिम कानून के तहत ‘इद्दत’ का मतलब महिला के पति की मौत अथवा तलाक के बाद एक निश्चित अवधि के लिए पर-पुरुष (जिनसे निकाह की संभावना हो) से दूर रहने से है। महिला इस अवधि के दौरान अपने पिता, सगे भाई और बेटे के सामने आ सकती है। इस अवधि के दौरान उसे पर्दे में रहना होता है। ‘इद्दत’ की अवधि तीन तरह की होती है। बुजुर्ग महिला को चार महीने 10 दिन इद्दत में रहना होता है। जवान महिला को तीन मासिक माहवारी के दौरान पर-पुरुष के सामने आने से बचना होता है। वहीं, गर्भवती महिला की इद्दत अवधि बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद खत्म हो जाती है।

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