वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन पालन कर पाये दोहरा लाभ- डा. श्रीवास्तव

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August 25, 2026

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वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन पालन कर पाये दोहरा लाभ- डा. श्रीवास्तव

-उजवा में वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण कार्य का उद्धाटन एवं ंव्यवसायिक जैविक खेती प्रशिक्षण का समापन
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/- सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली के द्वारा वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण का उद्धाटन एवं व्यवसायिक जैविक खेती के प्रशिक्षण के समापन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में डॉ .ए.के. श्रीवास्तव, कुलपति, उत्तरप्रदेश दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान, मथुरा, उत्तरप्रदेश उपस्थित हुयें। उन्होने कहा कि क्षेत्र के युवा एवं किसान वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन कर दोहरा लाभ उठा सकते है।
                कार्यक्रम की शुरुआत में डा. पी. के. गुप्ता, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान ंकेंद्र व् निदेशक, एन.एच आर. डी. एफ., नई दिल्ली, ने मुख्य अतिथि एवं प्रशिक्षुकों का स्वागत अभिनंदन करते हुए कृषि विज्ञान ंकेंद्र के द्वारा आयोजित हो रहे व्यवसायिक प्रशिक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। वैज्ञानिक प्रशिक्षण का उद्धघाटन करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में हमारे देश में 210 मिलियन टन दूग्ध उत्पादन हो रहा है जिसमें 49 प्रतिशत भैसों एवं 44 से 46 प्रतिशत गायों का योगदान है। डॉ. श्रीवास्तव जी ने प्रशिक्षुकों कौ दूग्ध में उपलब्ध पोषक तत्वों की शरीर में उपयोगिता के संबध में विस्तृत रुप से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में स्वरोजगार एवं कम लागत में अधिक आमदनी के लिए बकरी पालन सर्वोंत्तम व्यवसाय है। क्योंकि बकरी पालन मांस व दुग्ध दोनों के लिए सर्वोत्तम है। बकरी के दुग्ध में पाये जाने वाले पोषक तत्व जैसे जिंक, सेलेनियम, कॉपर एवं आयरन अन्य पशुओं की तुलना में अधिक पायी जाती हैं। जिसके पीने से शरीर मे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वर्तमान में हमारे देश में बकरियों की कुल संख्या 14 करोड़ से अधिक है एवं 34 प्रजातियॉ पंजीकृत है। इसी क्रम में डॉ. श्रीवास्तव ने केन्द्र की इस पहल की प्रसंशा करते हुए प्रशिक्षुकों से बकरी पालन के साथ साथ दुग्ध उत्पादन में मूल्य संवर्धन के लिए आग्रह किया एवं कहा कि बकरी के दूग्ध से हम पनीर व चीज बना सकते है जिसकी वर्तमान में बाजार में बहुत आवश्यकता है। कार्यक्रम के क्रम डॉ. जय प्रकाश विशेषज्ञ 1⁄4पशुपालन 1⁄2 ने बकरी पालन प्रशिक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी दी एवं आगामी 10 दिनों की प्रशिक्षण की रुपरेखा के बारे में अवगत करवाया।
                 जैविक प्रशिक्षुकों को प्रमाण पत्र कृषि विज्ञान केन्द्र उजवा, दिल्ली के जैविक खेती विषय पर व्यवसायिक प्रशिक्षण का आयोजन दिनांक 25 मार्च से 14 अप्रैल, 2022 तक आयोजित की गई। जिसमें दिल्ली देहात सहित, हरियाणा, उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के 26 प्रशिक्षुकों ने भाग लिया। इसमें भागीदारी करने वाले प्रशिक्षुकों को मुख्य अतिथि के द्वारा प्रशिक्षित प्रमाण पत्र दिया गया। मुख्य अतिथि ने प्रशिक्षुकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में वापस हमें जैविक खेती की तरफ अग्रसर होने की आवश्वकता है क्योंकि वर्तमान में हमें मानकों से अधिक मात्रा में खाद-उर्वरकों का प्रयोग करने लग गये जिससे हमारी मिट्टी की उर्वरकता क्षमता के साथ पानी, भोजन व आसपास का वातावरण भी प्रदुषित हो रहा है। जिसके प्रभाव से विभिन्न बिमारियों का सामना करना पड़ रहा है इसका एकमात्र विकल्प जैविक खेती ही है। कार्यक्रम के क्रम सभी जैविक खेती प्रशिक्षण के प्रशिक्षित सभी प्रशिक्षुकों से प्रतिक्रिया ली गई।
               कार्यक्रम के शुरुआत में माननीय मुख्य अतिथि के द्वारा केन्द ्र की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों एवं गतिविधियों का भ्रमण किया गया एवं अमूल्य सुझाव दियें। इस कार्यक्रम को सफल करने में डा. ऋतू सिंह, श्री राकेश कुमार, डा..डी. के. राणा, डा. समर पाल सिंह, श्री कैलाश, श्री बृजेश कुमार, श्रीमती मन्जू, श्री आत्माराम, श्री विशाल का सहयोग सहरानीय रहा।

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