एकीकृत निगम से एमसीडी के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का रास्ता होगा साफ

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August 25, 2026

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एकीकृत निगम से एमसीडी के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का रास्ता होगा साफ

-वर्षों से लंबित कर्मचारियों की मांगों पर राजनीति हो जायेगी बंद

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- बीते करीब दो दशकों से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे निगम के कच्चे कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। अब तक निगम कर्मियों को अपनी मांगों के लिए कभी दिल्ली सरकार तो कभी एमसीडी से लड़ना होता था लेकिन अब एकीकृत निगम बन जाने पर एमसीडी में कर्मचारियों के साथ होने वाली राजनीति पर पूर्ण रूप से विराम लग जायेगा और इसके लिए सिर्फ और सिर्फ एमसीडी ही उनकी मांगों के लिए उत्तरदायी होगा। हालांकि अभी तक एमसीडी यह कहकर कर्मचारियों की मांगों को टाल देती थी कि उनके हाथ में कुछ नही है यह दिल्ली सरकार का काम है।
               केंद्र सरकार ने दिल्ली के तीनों निगमों के एकीकरण की योजना बना कर उन एमसीडी कर्मचारियों को लाभ पंहुचाया है जो एमसीडी व दिल्ली सरकार की राजनीति में वर्षों से पिस्ते चले आ रह थे। बता दें कि एकीकृत निगम को लेकर जो नया बिल तैयार हो चुका है, उसमें निगम के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का अधिकार केवल निगम के पास होगा। अब उसमें दिल्ली सरकार का रोल खत्म कर दिया गया है। नए बिल के तहत सफाई कर्मचारी, डीबीसी कर्मचारी, सीएफडब्लू, नाला बेलदार, चौकीदार, स्कूली आया, जैसे ग्रुप डी कर्मचारियों की वैकेंसी भरना या फिर पद सृजन करने का काम सीधे-सीधे नगर निगम के हाथ में हुआ करेगा।
                 उधर फंड की बात करें तो दिल्ली सरकार से एमसीडी का जो हिस्सा अब तक आता रहा है वो आगे भी जारी रहेगा। लेकिन कई योजनाओं के तहत जो फंड केंद्र से दिल्ली सरकार से होकर निगम तक आया करता था वो भविष्य में सीधे एमसीडी को मिला करेगा।
                 भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा के अनुसार जो नया बिल तैयार हुआ है। उसमें स्कीम के तहत केंद्र सरकार से आने वाले फंड सीधे एमसीडी तक पहुंचा करेंगे। अब तक यह फंड दिल्ली सरकार से होकर नगर निगम में पहुंचा करते थे और कई बार दिल्ली सरकार इन फंडों को रोक भी लेती थी। वही फाइनेंस कमीशन व अन्य समितियों की सिफारिशें भी सीधे केंद्र सरकार की ओर से क्लियर हुआ करेंगी। इससे दिल्ली सरकार और एमसीडी का अब तक का झगड़ा समाप्त हो जाएगा।
                वही पद सृजन व रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया में भी बदलाव देखने को मिलेगा। अब तक पद सृजन को लेकर फाइल दिल्ली सरकार से पास होने के लिए जाया करती थी। जिसकी वजह से एमसीडी शासन व प्रशासन अपनी ओर से यही दलील देता रहा कि उनके हाँथ में पद सृजन का अधिकार नहीं। एकीकृत निगम में यह अधिकार केवल एमसीडी के पास होगा जिसकी वजह से निगम कर्मी अपनी मांग मजबूती से रख सकेंगे।
                  हालांकि दिल्ली की भाजपा पार्टी व केंद्र सरकार निगम एकीकरण को लेकर काफी आशांवित है लेकिन दिल्ली की आम आदमी की सरकार ठीक इसके विपरीत भाजपा पर दिल्ली को बांटने की साजिश का आरोप लगा रही है। उनका कहना है कि इस बार एमसीडी में भाजपा की हालत खसता है जिससे डरकर भाजपा केंद्र सरकार के सहारे दिल्ली में दिल्ली सरकार के समकक्ष हुकुमत का नया ऐजेंडा पेश कर रही है। लेकिन यह सब भाजपा को ही भारी पड़ने वाला है।

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