संवेदनाओं के लिए वैदिक शिक्षा जरूरी- एम नागराजन

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संवेदनाओं के लिए वैदिक शिक्षा जरूरी- एम नागराजन

-भारतीय नववर्ष पर अध्यात्म योग संस्थान ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज़/द्वारका/भावना शर्मा/- भारतीय नववर्ष के उपलक्ष्य में अध्यात्म योग संस्थान एवं फिट इंडिया क्लब के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इस अवसर मुख्यअतिथि एवं हुडको के डायरेक्टर श्री एम नागराजन ने कहा कि आधुनिक शिक्षा ने हमारे संस्कारों का नाश कर दिया है इसलिए संवेदनाओं के लिए वैदिक शिक्षा जरूरी है। इस मौके पर योगाचार्य डॉ. रमेश कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं फिट इंडिया व अध्यात्म योग संस्थान के महासचिव अनिल बाल्याण ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
                मुख्य अतिथि के रूप में आवास और शहरी विकास निगम (हुडको) के डायरेक्टर श्री एम नागराजन ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2079 (2अप्रैल, 2022) हमारी वैदिक संस्कृति का वैज्ञानिक पर्व है और यह पर्व आज से एक अरब, छयानवे करोड साल पहले हुई सृष्टि उत्पत्ति से लेकर आज तक निरंतर मनाया जाता रहा है। इसी दिन भगवान श्री रामचंद्र जी का राज्याभिषेक हुआ था तथा महाराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक 5157 वर्ष पूर्व इसी दिन हुआ था। उन्होने कहा कि आधुनिक शिक्षा ने हमारे संस्कारों का नाश कर दिया है इसलिए हमारा समाज संवेदना और संस्कार हीन हो गया है। हमें संस्कारों का पुनः स्थापन करने के लिए वैदिक शिक्षा प्रणाली अर्थात् वेद, उपनिषद, दर्शन आदि का अध्ययन करना चाहिए।
               कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. ईश्वर भारद्वाज पूर्व डीन गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने बताया कि हमारी संस्कृति विश्व के महान  संस्कृतियों में सर्वश्रेष्ठ संस्कृति रही है, 2078 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन अपना राज्य स्थापित किया। उसी दिन से प्रसिद्ध विक्रमी संवत् का प्रारंभ हुआ जो आज तक चल रहा है । लार्ड मैकाले से पहले हमारे भारतवर्ष में 99 प्रतिशत लोग शिक्षित थे, लेकिन मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा को भारत में थोपने के साथ-साथ हमारे समाज को संस्कार हीन कर दिया जिससे हम अपनी संस्कृति अपने धर्म और धार्मिक अनुष्ठानों से विमुख होते गए।
               कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. वेद प्रकाश डिंडोरिया संस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय ने बताया आज ही के दिन 147 वर्ष पूर्व महर्षि दयानंद सरस्वती ने मुंबई में सर्वप्रथम आर्य समाज की स्थापना की थी जिनके विचारों पर चलकर देश ने आजादी प्राप्त की थी।  वेद प्रचार का महान कार्य करने वाला एकमात्र संगठन है। यह नवरात्रों का प्रथम दिन है  मां दुर्गा शक्ति की केंद्र बिंदु है लोग 9 दिन शक्ति रूपा देवी की उपासना करते हैं,  यह पर्व पूरे देश में अनेक नामों से धूमधाम से मनाया जाता है।
                विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. दिनेश कुमार यादव शिक्षा विभाग श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने कहा कि यह हमारा गौरव पूर्ण वर्ष का प्रारंभ है वसंत ऋतु का आरंभ प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधी रहती है। इस समय में प्रकृति अपना  श्रृंगार करती  है वनस्पतियां, पेड़, पौधे सभी नई पत्तों और फूलों से सुसज्जित होते हैं ।
               योगाचार्य डॉ. रमेश कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने बताया यह नववर्ष का यह पर्व  हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि इस समय नया अनाज हमारे घर मे आता है जिससे हमारे घर धन-धान्य से परिपूर्ण होते हैं। नवरात्रों का प्रारंभ से ही लोग योग और उपवास के द्वारा माता के विभिन्न रुपों की उपासना करते हैं माता शक्ति रूपिणी अपने उपासकों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है। जिससे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।
              डॉ. श्रीमती आरती शर्मा ने बताया कि ब्रह्म पुराण में कहा गया है कि ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि की संरचना की थी । इसी दिन आज से 1,97,38,13,122 वर्ष पूर्व ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इस लिए इस को (सृष्टि संवत्) भी कहते है इस के बाद लगभग एक करोड़ साल बाद इसी दिन आज से 1,96,08,53,122 वर्ष पूर्व इस सृष्टि में प्रथम युवा मनुष्यों के जोड़ों ने जन्म लिया था। इस लिए इसे मानव संवत् कहा गया है ।
              डॉ. ज्ञानेंद्र शिक्षा विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय ने बताया कि हमारे भारतीय महीनों के नाम नक्षत्रों के आधार पर रखे गए हैं यह सभी वैज्ञानिकता के आधार पर रखे गए हैं हमें अपनी संस्कृति में विद्यमान भारतीय महीनों व तिथियों  को जन-जन तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम का संचालन राहुल शर्मा एवं संयोजक आनंद कुमार ने किया, सरस्वती वंदना यशवी मिश्रा ने और मंगलाचरण श्री हर्ष कुमार शुक्ल योग शिक्षक श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने किया। कार्यक्रम के अंत में संस्था के महासचिव अनिल बाल्यान ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया और बताया कि लगभग 45 लोगों ने इस कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर भाग लिया ।

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