नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- सरकार की संचार सुरक्षा और मोबाइल सेफ्टी के लिए बनाई गई संचार साथी एप (Sanchar Saathi App) हाल ही में विवादों के बावजूद चर्चा में बनी हुई है। विपक्ष और कुछ विशेषज्ञ एप को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आम जनता ने इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स दिया है। मंगलवार को एप के डाउनलोड अचानक 10 गुना बढ़कर लगभग 6 लाख तक पहुंच गए, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा करीब 60 हजार ही रहता था। इस प्रकार एक दिन में एप के डाउनलोड ने रिकॉर्ड बना दिया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आदेश जारी होने से पहले ही 1.5 करोड़ लोग एप डाउनलोड कर चुके थे। 28 नवंबर को जारी सरकार के आदेश में सभी मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि नए और पुराने सभी फोन्स में संचार साथी एप प्री-इंस्टॉल किया जाए। दूरसंचार विभाग के आदेश के मुताबिक, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एप पहली बार फोन ऑन करने पर यूजर को दिखाई दे।
एप को छिपा या निष्क्रिय करके कंपनियां कॉम्प्लायंस का दावा नहीं कर सकतीं। वहीं, टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया कि यूजर चाहे तो एप को अनइंस्टॉल भी कर सकता है। कंपनियों को इसे लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है।
संचार साथी एप क्या है?
संचार साथी को पहली बार 2023 में पोर्टल के रूप में लॉन्च किया गया था। यह एप उपयोगकर्ताओं को स्कैम कॉल रिपोर्ट करने, नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड की पहचान करने, और फोन चोरी होने पर उसे निष्क्रिय करने की सुविधा देता है। एप का वर्जन TRAI के DND पोर्टल जैसी सुविधाएं प्रदान करता है और अब मोबाइल वर्जन में भी वही सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके जरिए सरकार का उद्देश्य मोबाइल यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाना और फोन संबंधी धोखाधड़ी को रोकना है।
इस तेजी से बढ़ते डाउनलोड और जनता के रिस्पॉन्स ने स्पष्ट कर दिया है कि एप को लेकर भले ही विवाद हो, लेकिन उपयोगकर्ताओं में इसके प्रति विश्वास और मांग मजबूत बनी हुई है।


More Stories
द्वारका जिला पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पीओ एवं जेल बेल सेल ने अवैध शराब तस्कर को दबोचा
द्वारका जिला पुलिस की बड़ी कामयाबी: अवैध हथियार के साथ कुख्यात बदमाश गिरफ्तार
गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का कहर, 4 साल के मासूम पर जानलेवा हमला
द्वारका सेक्टर-7 में कपड़ों के गोदाम में भीषण आग, लाखों का नुकसान
मुंबई मेयर पद पर सियासी घमासान, होटल पॉलिटिक्स पर संजय राउत का तीखा हमला
मौनी अमावस्या पर संगम तट पर तनाव, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोका गया