संघ स्थापना के 100 वर्ष पर वैचारिक महाकुंभ, देश की चुनौतियों और उपलब्धियों पर मंथन

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
January 19, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-स्वामी चिदानंद सरस्वती का आध्यात्मिक दृष्टिकोण

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाला सीताराम गोयल की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला 75.0 एक बड़े वैचारिक महाकुंभ के रूप में सामने आई, जहां देशभर से आए वरिष्ठ संघ पदाधिकारियों, संतों, विद्वानों, शिक्षाविदों और सांस्कृतिक हस्तियों ने भारत, हिंदुत्व, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से विचार साझा किए। आठ घंटे तक चले इस कार्यक्रम में 20 से अधिक वक्ताओं ने अपने विचारों से श्रोताओं को बांधे रखा।

संघ की सौ साल की संघर्षपूर्ण यात्रा पर चर्चा
व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना के कारणों, शुरुआती संघर्षों, प्रतिबंधों, सामाजिक विरोधों और राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि संघ ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद संगठन, संस्कार और सेवा के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य किया है।

सुनील देवघर का तीखा संबोधन
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता भाजपा के वरिष्ठ रणनीतिकार और आंध्र प्रदेश के सह-प्रभारी सुनील विश्वनाथ देवघर ने संघ के सौ वर्षों के सफर को संघर्ष और संकल्प की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज के सामने कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं और इन्हें पहचानना आवश्यक है। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और जनसंख्या संतुलन जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे और कहा कि समाज को सजग रहकर अपने मूल्यों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की पहचान, संस्कृति और राष्ट्रभाव से किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं है।

पूर्वोत्तर भारत में संगठन विस्तार की कहानी
देवघर ने पूर्वोत्तर भारत में संघ और भाजपा के विस्तार के दौरान आई कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां भाषा, संस्कृति, जनजातीय विविधता और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद कार्यकर्ताओं ने समर्पण भाव से काम किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय भाषा और संस्कृति को समझकर ही संगठन वहां जन-जन तक पहुंच सका।

स्वामी चिदानंद सरस्वती का आध्यात्मिक दृष्टिकोण
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि संघ का मूल मंत्र स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए कार्य करना है। उन्होंने संघ को संस्कारों की यात्रा बताते हुए कहा कि पांच लोगों से शुरू हुआ यह आंदोलन आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, गंगा आरती और कुंभ जैसे आयोजनों को विश्व में भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बताया।

संस्कृति के माध्यम से राष्ट्र निर्माण: मालिनी अवस्थी
पद्मश्री सम्मानित लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि भारत संस्कृति के बल पर ही विश्व गुरु बन सकता है। उन्होंने संस्कार भारती की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कला और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य संघ ने प्रभावी ढंग से किया है। उन्होंने कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्व पर भी अपने विचार रखे।

कानूनी और सामाजिक चुनौतियों पर मंथन
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कानून, जनसंख्या, घुसपैठ और सामाजिक संरचना से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जागरूक समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव होता है और इसके लिए नागरिकों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

संघ और हिंदुत्व पर पत्रकारों व शिक्षाविदों की राय
वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि संघ आज भारत, सनातन और हिंदुत्व का पर्याय बन चुका है। वहीं चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा को सामाजिक जागरण और संगठनात्मक मजबूती की मिसाल बताया।

गरिमामयी आयोजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
होटल क्राउन प्लाजा में आयोजित इस कार्यक्रम में संघ, विहिप, शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कवि योगेन्द्र शर्मा के काव्य पाठ और राजेन्द्र शर्मा की संगीत प्रस्तुति ने आयोजन को सांस्कृतिक रंग दिया। प्रभावशाली मंच संचालन राजेश चेतन ने किया। कार्यक्रम का आयोजन चेतना संस्था और एस आर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox