शिव सेना के विकल्प के रूप में तैयार हो रही मनसे !

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शिव सेना के विकल्प के रूप में तैयार हो रही मनसे !

-अब महाराष्ट्र में अजान के जवाब में हनूमान चालीसा, राज ठाकरे ने दिखाये उग्र हिन्दू तेवर. -भाजपा से बढ़ रही नजदीकियां, नितिन गडकरी व राज ठाकरें में हुई मुलाकात

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/महाराष्ट्र/शिव कुमार यादव/- महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने जहां प्रदेश में शिव सेना का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है वहीं मनसे ने भी अपने उग्र हिन्दू तेवर दिखाने शुरू कर दिये हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले तक भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ आक्रामक रूख दिखाने वाले मनसे प्रमुख राज ठाकरे अब हिन्दुत्व मुद्दे पर उग्र रूप दिखा रहे है। राज ठाकरे ने प्रदेश में ऐलान किया है कि यदि मस्जिदों से अजान की आवाज आई तो मनसे उनके सामने इसके जवाब में हनुमान चालिसा पढेगी। राज ठाकरे की इस सियासी चाल ने एक बार फिर राज्य में नये सियासी समीकरण के संकेत दे दिये। इतना ही नही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व राज ठाकरे की हाल ही की मुलाकात भी इसी और संकेत दे रही है। सियासी गलियारों में अब एक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि क्या मनसे महाराष्ट्र में शिव सेना के विकल्प के तौर पर भाजपा का हिन्दूत्व वादी राजनीतिक चेहरा बनने जा रही है ं?
                   यहां बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना की स्थापना ही हिन्दूत्व के मुद्दे पर हुई थी। शिव सेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे ने प्रदेश में कांग्रेस व अन्य हिन्दू विरोधी पार्टियों को झटका देने के लिए शिवसेना का गठन किया था। आज प्रदेश में शिव सेना अपने वैचारिक विरोधियों कांग्रेस व एनसीपी के साथ गठबंधन कर सरकार चला रही है। लेकिन इसे गठबंधन की मजबूरी कहें या फिर सत्ता की लालसा, अकसर कई अवसरों पर शिव सेना हिन्दुत्व के मुद्दे पर कमजोर दिखी है। जिसका फायदा अब मनसे के संस्थापक राज ठाकरे उठाने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे भी राज ठाकरे ने राजनीति की एबीसीडी बाला साहेब ठाकरे के सान्निध्य में सीखी है और इस समय हिन्दुत्व के मुद्दे पर काफी मुखर दिखाई दे रहे है। वहीं भाजपा भी अब शिवसेना का विकल्प राज्य में तलाश रही है और राज ठाकरे से नजदीकियां बढ़ा रही है।
                  ताजा घटनाक्रम के अनुरूप मनसे इस समय राज्य में अपना वजूद बनाये रखने के लिए मुद्दों की तलाश कर रही है जो शिवसेना ने उसे दे दिया है। प्रदेश में मस्जिदों में लाउडस्पीकर बंद करने के मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए राज ठाकरे ने ऐलान जारी किया है कि यदि मस्जिदों में लाउडस्पकीरों पर अजान बंद नही हुई तो उनकी पार्टी इसके जवाब में हनुमान चालीसा को तेज आवाज में मस्जिदों के बाहर बजायेगी। उन्होने अपने हिन्दुवादी तेवर दिखाते हुए महाराष्ट्र सरकार को भी चुनौति दी है कि या तो सरकार लाउडस्पीकर पर अजान बंद कराये नही तो मनसे इसका जवाब हनुमान चालीसा से देगी। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री व अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार पर भी निशाने साधने शुरू कर दिये हैं। राज ठाकरे के उग्र हिंदुत्व रूप को देखते हुए अब भाजपा ने भी अपनी रणनीतिक चाल चलनी शुरू कर दी है। जिसके तहत राज ठाकरे के हनुमान चालीसा वाले बयान के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री व बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने मुंबई में राज ठाकरे के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की हैं। जिसके बाद से प्रदेश में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। ऐसे में चर्चाएं ये भी हैं कि क्या महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी.के लिए राज ठाकरे शिवसेना का विकल्प तो नहीं बन रहे हैं, क्योंकि राज ठाकरे ने 2019 के बाद से अपना सियासी ट्रैक चेंज कर रखा है।
                 दरअसल, शिवसेना महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी के साथ मिलकर लंबे समय तक हिंदुत्व के एजेंडे पर सियासी तौर पर कदमताल करती रही है। राज ठाकरे ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रखा था। मुंबई में रैली करके बीजेपी नेताओं और देवेंद्र फडणवीस के पुराने बयानों को दिखा कर उन्होंने एंटी मोदी स्टैंड लिया था। हालांकि उन्होंने 2019 में एक भी सीट पर अपनी पार्टी से कैंडिडेट नहीं उतारे थे, लेकिन मोदी के विरोध में दस रैलियां की। लेकिन महाराष्ट्र के 2019 विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता के लिए बीजेपी-शिवसेना की 25 सालों की दोस्ती टूटी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी वैचारिक विरोधी मानी जाने वाली कांग्रेस-एनसीपी के साथ हाथ मिलाकर सत्ता की कमान अपने हाथों में ले ली। शिवेसना की मौजूदा सहयोगी कांग्रेस और एनसीपी दोनों ही हिंदुत्व की राजनीति के बजाय धर्मनिरपेक्ष वाली सियासत करना पसंद करती है। महाराष्ट्र के बदले हुए सियासी मिजाज में राज ठाकरे ने अपना राजनीतिक ट्रैक चेंज किया है, ऐसे में वो ऐसे तमाम मुद्दों को उठा रहे हैं, जो उग्र हिंदुत्व को धार देने वाले माने जाते हैं। ऐसे में शिवसेना के हिन्दू वोट बैंक पर भी असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।
                 हालांकि अभी तक राज ठाकरे की कट्टर मराटी छवि ही सबके सामने थी लेकिन अब राज ठाकरें ने अपनी छवि में बलाव करते हुए हिन्दूत्ववादी नेता के तौर पर मजबूत करने की कवायद में जुट गये हैं ताकि महाराष्ट्र में शिवसेना के पारंपरिक हिंदू वोटबैंक में सेंध लगा सकें। जो कांग्रेस-एनसीपी के चलते फिलहाल शिव सेना से नाराज माने जा रहे हैं। वही भाजपा भी अभी तक राज ठाकरे की कट्टर मराटी छवि के चलते उससे दूरी बनाये हुए थी लेकिन अब बदले हालात में हो सकता है भाजपा भी राज ठाकरें को करीब आने का अवसर दे दे। इतना ही राज ठाकरे भी अब इस बात को समझने लगे है और उन्प्होने अपना सियासी ट्रैक चेंज किया है जिसे देखते हुए बीजेपी के नेताओं के साथ उनकी नजदीकियां भी साफ दिख रही हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र के बीजेपी नेता राज ठाकरे के लाउड स्पीकर वाले बयान के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं।
                 बता दें कि राज ठाकरे ने 2006 में अलग महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नाम से अलग पार्टी बना ली थी। इसके बाद तीन विधानसभा और तीन लोकसभा चुनाव हुए हैं। मनसे कोई खास सफलता हासिल नहीं कर सकी। 2014 में बीजेपी से राज ठाकरे को उम्मीद थी कि मनसे को साथ लेकर चलने में बीजेपी को दिक्कत नहीं होगी लेकिन तब बीजेपी ने शिवसेना से नाता न तोड़ने को ही समझदारी मानी। बीजेपी का साथ न मिलने से बेचैन राज ठाकरे ने 2019 में पवार के साथ जाने की भी कोशिश की लेकिन 2019 में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के साथ आने से सभी समीकरण बदल गए। साल 2019 में हुए महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बीजेपी के खिलाफ थी, लेकिन अब दोनों की केमिस्ट्री बनती नजर आ रही है. हालांकि, बीजेपी के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उत्तर भारतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले राज ठाकरे को साथ में कैसे लिया जाए। सूबे के बदले हुए सियासी माहौल में शिवसेना वाले महाविकास अघाड़ी से मुकाबले के लिए बीजेपी फूंक-फूंककर सियासी कदम बढ़ा रही है और राज ठाकरे को साथ लेने पर नफे-नुकसान को भी तौल रही है। ऐसे में देखना है कि बीएमसी चुनाव में किस तरह से दोनों के बीच सियासी केमिस्ट्री दिखती है।  
                   राज ठाकरे का यह उग्र हिंदुत्व का तेवर बीजेपी के लिए काफी मुफीद नजर आ रहा है, क्योंकि बीजेपी नेता पहले से ही मस्जिदों से लाउड स्पीकर हटाने का मुद्दा उठा रहे थे। इसके अलावा मदरसों में छापा मारने की बात भी राज ठाकर ने उठाई थी, जिस पर बीजेपी भी मुखर रही है। राज ठाकर ने 2022 जनवरी में अपनी पार्टी का चौरंगी झंडा बदलकर उसे भगवा रंग दिया है और शिवाजी की मुहर को अपनाया. है। राज ठाकरे ने मंच पर सावरकर की फोटो सजाकर हिंदुत्व की दिशा में कदम बढ़ाने के मंसूबे जाहिर करते हुए कहा था कि ये वो झंडा था, जो पार्टी की स्थापना करते वक्त उनके मन में था और हिंदुत्व उनके डीएनए में है।  
                गुड़ी पड़वा के मौके पर पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस सहित कई बीजेपी के नेता मनसे प्रमुख राज ठाकरे के घर भोजन करने पहुंचे थे। वहीं. केंद्रीय मंत्री नितिन ने रविवार को मुंबई में राज ठाकरे के घर जाकर मुलाकात की। गडकरी ने इस बैठक के पीछे कुछ भी राजनीतिक होने से इनकार करते हुए भले ही इसे एक पारिवारिक बैठक बताया हो, लेकिन सियासी गलियारों में बीजेपी के साथ उनकी बनती सियासी केमिस्ट्री की चर्चा तेज है। वहीं विपक्षी दलों ने अब  राज ठाकरे को बीजेपी की बी-टीम बताना शुरू कर दिया है।
                उधर मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने की राज ठाकरे की बात पर शिवसेना में भी हलचल शुरू हो गई है। शिव सेना सांसद संजय राउत ने कहा कि, महाराष्ट्र में कानून का राज कायम है। उन्होंने कहा कि शिवाजी पार्क.में राज ठाकरे का बयान बीजेपी के द्वारा प्रायोजित था। मनसे प्रमुख ने वही बोला, जो बीजेपी ने उन्हें लिख कर दिया था।
                राज ठाकरे द्वारा शरद पवार को निशाने पर लेने पर संजय राउत ने कहा कि आप कुछ समय पहले तक पवार के चरणों में उनका मार्गदर्शन लेने के लिए बैठते थे। आपको पवार जैसी महान शख्सियतों पर बोलने से पहले सोचना चाहिए। साथ ही राउत ने कहा कि शिवसेना इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देती क्योंकि पार्टी का एजेंडा महाराष्ट्र का विकास सुनिश्चित करना और राज्य भर में अपना भगवा झंडा फहराना है।

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