विद्यार्थियों को कृषि नवाचार से जोड़ने के लिए विज्ञान केन्द्र में इंटरफेस कार्यकम की हुई शुरुआत

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विद्यार्थियों को कृषि नवाचार से जोड़ने के लिए विज्ञान केन्द्र में इंटरफेस कार्यकम की हुई शुरुआत

-कृषि नवाचार से देश के छात्र-छात्राएं सिखेंगे कृषि प्रोद्योगिकी प्रबंधन, टिकरिंग प्रयोगशाला से निकलेगी कृषि की नई राह

नजफगढ़/उजवा/शिव कुमार यादव/- नीति आयोग का अटल नवाचार मिशन (एआईएम) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने देश भर के स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच कृषि क्षेत्र से संबंधित नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी ( आत्मा) के साथ अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) को जोड़ने की शुरुआत की गई, जिससे विधार्थियो को शिक्षा एवं कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग कृषि नवाचार विकसित करने का प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया जाए। इस कार्यकम के प्रथम चरण में देशभर के 11 कृषि विज्ञान केन्द्रों को 55 अटल टिकरिंग प्रयोगशालाओं से जोड़ा जा रहा है।
         इसी संदर्भ में, दिनांक 19 सितम्बर, 2023 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली के द्वारा अटल नवाचार मिशन के तहत अटल टिकरिंग प्रयोगशालाओं, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) के एक इंटरफेस कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केन्द्र, दिल्ली से किया गया, जिसमे मुख्य अतिथि के रुप में माननीय डॉ. यू. एस. गौत्तम, उप महानिदेशक (कृषि प्रसार), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली एवं विशिष्ट अतिथि के रुप में डॉ. आर. रॉय बरमन, सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार), डॉ. आर.के. सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार), डॉ. जे.पी. मिश्रा, निदेशक, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जोन-2, जोधपुर (राजस्थान), डॉ. एस.के.झा, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) व डॉ. केशव, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली एवं डॉ. एस.के. मिश्रा, निदेशक, आत्मा परियोजना, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार उपस्थित हुए एवं टिकरिंग प्रयोगशाला के उपयोगिता एवं महत्व सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यकम का संचालन सुश्री दिपाली उपाध्याय, कार्यक्रम निदेशक, अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग, भारत सरकार ने किया एवं गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों को अटल टिकरिंग प्रयोगशालाओं के उद्देश्य, कार्य योजना एवं भविष्य की रुपरेखा के बारे में विस्तृत रुप से जानकारी दी।
         कार्यकम के शुरुआत में, डॉ. यू. एस. गौत्तम जी ने कहा कि देशभर में 731 कृषि विज्ञान केन्द्र, 11 कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) के तत्वाधान में “कृषि ज्ञान से संबंधित संसाधन और क्षमता विकास केन्द्र की एकल खिड़की“ के रूप में कार्य कर रहे हैं। नीति आयोग की इस नवाचारी पहल से कृषि क्षेत्र में विधार्थियों की शिक्षा के साथ नवीनत्तम नवाचार विकसित करने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा, जिसमें कृषि विज्ञान केन्द्रों की महत्वपुर्ण भूमिका रहेगी जो विधार्थियों को कृषि की आगामी परिस्थितियों से अवगत करवाते हुए नवाचार विकसित करनें के साथ-साथ नवाचार की सुदृढ़ एवं प्रमाणित करने की भी सुविधा प्रदान करेगा एवं आवश्यकतानुसार प्रौद्योगिकी बैकस्टॉपिंग, ज्ञान-साझाकरण एवं कौशल-निर्माण संबंधी अभ्यास, पत्र पत्रिका एवं अन्य बीज, रोपण सामग्री और अन्य सामग्री भी मुहैया करायेंगे। इसी संदर्भ में, अटल टिकरिंग प्रयोगशाला के चयनित विधालय कृषि विज्ञान केन्द्रों पर भ्रमण करेगें एवं केन्द्र के विशेषज्ञों व किसानों के साथ नवाचार पर वार्तालाप करेगें।
        डॉ. एस.के. मिश्रा जी ने कहा कि नीति आयोग की बहुत ही सराहनीय पहल है, क्योकि बच्चे देश के भविष्य है एवं उनके द्वारा प्रयोगशाला में विकसित नवाचार को किसानों के प्रक्षेत्र तक ले जाने में कृषि विज्ञान केन्द्र एवं आत्मा परियोजना की अहम भूमिका रहेगी। इस कार्यकम में 11 कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों के निदेशक, 11 कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ व 55 अटल टिकरिंग प्रयोगशालाओं संचालित कर रही विधालयों के प्रधानाध्यापक एवं अटल इनोवेशन मिशन के अधिकारियों ने भी भागीदारी की एवं बाल भारती पब्लिक स्कूल, द्वारका, दिल्ली एवं महाराजा अग्रसेन विधालय, पीतमपुरा, दिल्ली के विधार्थियों ने कृषि आधारित नवाचारी मॉडल प्रस्तुत किए, जिसकी उपस्थित वैज्ञानिकों ने काफी प्रशंसा की।
          कार्यक्रम के अंत में डॉ. पी. के. गुप्ता अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली ने सभी गणमान्य अतिथियों, वैज्ञानिक गणों एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यकम के दौरान माननीय अतिथियों ने केन्द्र के प्रशिक्षित उधमियों की प्रदर्शनी देखी एवं केन्द्र के कार्यो की सहारना की। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र की सभी वैज्ञानिकगण एवं अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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