राधा अष्टमी: श्रीकृष्ण की प्रिय राधारानी के जन्मदिवस पर जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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राधा अष्टमी: श्रीकृष्ण की प्रिय राधारानी के जन्मदिवस पर जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। जो श्रीकृष्ण की प्राणप्रिया राधा रानी के जन्मोत्सव का प्रतीक है। यह पर्व 31 अगस्त 2025को देशभर में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि राधा रानी की पूजा से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15दिन बाद आता है, जो राधा-कृष्ण के अनन्य प्रेम और भक्ति का उत्सव है। राधा रानी का प्रेम वह पवित्र भाव है, जो भक्तों को भक्ति के रस में डुबो देता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और सामग्री
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष राधा अष्टमी पर अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से दोपहर 12:47 तक रहेगा, जबकि अमृत काल रात 11:37 से अगले दिन दोपहर 1:23 तक रहेगा। इन शुभ मुहूर्तों में पूजा और शुभ कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। पूजा के लिए पंचामृत, लाल या गुलाबी चुनरी, सिंदूर, कुमकुम, चंदन, गंगाजल, फूल, मोर पंख, बांसुरी, और शृंगार का सामान आवश्यक है। भोग में माखन-मिश्री, खीर, पीली मिठाई, फल, और अरबी अर्पित करना शुभ माना जाता है। यह भोग राधा रानी के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

राधा अष्टमी की पूजा विधि
राधा अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर राधा-कृष्ण की मूर्ति स्थापित की जाती है। दोनों को पंचामृत से अभिषेक कर, नए वस्त्र और आभूषणों से सोलह शृंगार किया जाता है। भोग में पंजीरी, फल और मिठाई अर्पित कर राधा रानी के मंत्रों का जाप किया जाता है। पूजा के अंत में राधा-कृष्ण की आरती कर भक्त अपनी भक्ति अर्पित करते हैं। अगले दिन व्रत का पारण कर उत्सव पूर्ण होता है।

राधा रानी के मंत्र और भक्ति रस
राधा अष्टमी पर भक्त मंत्रों जैसे ॐ वृषभानुज्यै विद्महे, कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात् और ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात् का जाप करते हैं। ये मंत्र राधा रानी की भक्ति में डूबने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह पर्व भक्तों को राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति के रस में डुबोकर जीवन को आनंदमय बनाता है। राधा रानी की कृपा से भक्तों का मन शांति और प्रेम से भर जाता है।

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