यज्ञ और योग साधना से ही ईश्वर को पाया जा सकता है-आचार्या श्रुति सेतिया

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यज्ञ और योग साधना से ही ईश्वर को पाया जा सकता है-आचार्या श्रुति सेतिया

-“ईश्वर को कौन प्राप्त कर सकता है“ पर गोष्ठी सम्पन्न
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- मंगलवार को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “ईश्वर को कौन प्राप्त कर सकता है“ विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कोरोना काल में 392 वां वेबिनार था।
                इस अवसर पर  वैदिक विदुषी आचार्या श्रुति सेतिया ने कहा कि यज्ञ और योग साधना से ही ईश्वर को पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सरलतम रूप में ईश्वर को जानना व उसे प्राप्त करना चाहता है। हिंदू समाज में अनेकों को मूर्ति पूजा सरलतम लगती है,क्योंकि यहां स्वाध्याय, ज्ञान व जटिल अनुष्ठानों आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती। क्योंकि वह संसार की सर्वोत्तम वस्तु “ ईश्वर“ की प्राप्ति के लिए कुछ भी प्रयास नहीं करना चाहते और सोचते हैं कि कोई उसके स्थान पर तप व परिश्रम करें और उसे उसका पूरा व अधिकतम लाभ मिल जाए। ऐसा पहले कभी ना हुआ है और ना भविष्य में कभी होगा। यदि किसी को ईश्वर को प्राप्त करना है तो पहले उसको उसके यथार्थ रूप में जानना होगा। उस ईश्वर व जीवात्मा के यथार्थ स्वरूप को जानकर या फिर किसी सच्चे विद्वान अनुभवी वैद्य गुरु का शिष्य बन कर उससे ईश्वर की प्राप्ति करने की सरलतम विधि जानी जा सकती है। ईश्वर को जानने व प्राप्त करने की सरलतम विधि के लिए आपको महर्षि दयानंद व आर्य समाज की शरण में आना होगा। महर्षि दयानंद ने वेदों के आधार पर अपने ग्रंथों में ईश्वर, जीवात्मा व प्रकृति के साथ व यथार्थ रूप का वर्णन किया है, जिससे स्वयं पढ़कर जानना और समझना है। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए जीवात्मा को स्तुति, प्रार्थना सहित,संध्या उपासना कर्मों व साधनों को करना है। मनुष्य जब ईश्वर की स्तुति प्रार्थना उपासना करते हुए ईश्वर में मगन हो जाता है तो समाधि के निकट होते हैं। कालांतर में ईश्वर की कृपा होती है और जीवआत्मा को ईश्वर का प्रत्यक्ष व साक्षात्कार होता है। अष्टांग योग से परमात्मा के समीपस्थ होने और उसको सर्वव्यापी, सर्वान्तर्यामी से प्रत्यक्ष करने के लिए जो जो काम करना होता है वह वह करना चाहिए। यह भी विचारणीय है कि सभी मत, मतों के अनुयाई भिन्न-भिन्न प्रकार से उपासना व पूजा आदि करते हैं। क्या उन्हें ईश्वर की प्राप्ति होती है व नहीं? विचार करने पर हमें लगता है कि उससे लाभ नहीं होता, जो लाभ होता है वह उनके पुरुषार्थ तथा प्रारब्ध से होता है। ईश्वर के यथार्थ ज्ञान तथा योग दर्शन की विधि से उपासना किए बिना किसी को ईश्वर की प्राप्ति व धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की सिद्धि प्राप्त नहीं होती। यह स्वाध्याय व चिंतन से स्पष्ट होता है। अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए सभी को वैदिक धर्म व वैदिक उपासना पद्धति का ही आश्रय लेना उचित है। यही ईश्वर प्राप्ति की एकमात्र सरल विधि है अन्य प्रकार की उपासना से ईश्वर प्राप्ति संभव नहीं है।
               केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि ईश्वर के प्रति दृढ़ विश्वास व समर्पण आवश्यक है। मुख्य अतिथि संतोष कपूर व अध्यक्ष मीरा आर्या(प्रधाना आर्य समाज इंदिरापुरम) ने भी ईश्वर के गुणों का गुणगान करते हुए स्तुति व उपासना का मार्ग समझाया। राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहां की ध्यान योग द्वारा परमात्मा से साक्षात्कार संभव है। गायक राजेश मेंहदीरत्ता, अशोक गुगलानी, रविन्द्र गुप्ता, प्रवीना ठक्कर, सुनीता अरोड़ा, राज अरोड़ा, उमा मिगलानी, दीप्ति सपरा, सरला बजाज, अनुश्री खरबंदा, कमला हंस, जनक अरोड़ा, रजनी गर्ग आदि के भजन हुए ।

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