नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/हैल्थ डेस्क/शिव कुमार यादव/- भारत समेत दुनियाभर में कोरोना वायरस का एक नया वेरिएंट फिर से वैज्ञानिकों को डराने लगा है। कोरोना के इस नए वेरिएंट का नाम आकटूरस है और वैज्ञानिकों का कहना है कि हम इससे निपटने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। आकटूरस वेरिएंट को एक्सबीबी.1.16 के नाम से भी जाना जाता है और यह पूरी दुनिया में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसकी वजह से कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं और वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आकटूरस जल्द ही पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्रबल वेरिएंट बन जाएगा। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि विश्वभर में जिस तरह से टेस्टिंग और कोविड रोकथाम की गतिविधियां कम हो गई हैं, उससे एक बार फिर कोरोना प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि ओमिक्रोन का यह सब वेरिएंट पिछले स्ट्रेन की तुलना में ज्यादा आक्रामक हो सकता है। इसकी वजह स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन है। इस नए वेरिएंट का बच्चों में बहुत बुरा असर पड़ रहा है। बच्चे कॅनजक्टिवीटी के शिकार हो रहे हैं। भारत में इस समय कोरोना के मामलों में बहुत ज्यादा तेजी आ गई है। हर सप्ताह भारत में 11,109 नए मामले सामने आ रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह आकटूरस वेरिएंट की वजह से है। यह कोविड स्ट्रेन अब भारत, ब्रिटेन समेत दुनिया के 22 देशों तक पहुंच गया है। इसके फैलने का क्रम लगातार जारी है जिससे वैज्ञानिक टेंशन में आ गए हैं।

दुनिया में घट गई है कोरोना की टेस्टिंग
ब्रिटेन के वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर लारेंस यंग ने द इंडिपेंडेंट से बातचीत में कहा कि जब भी एक नया वेरिएंट पैदा होता है तो आपको उसका पता लगाना होता है क्या वह पहले से ज्यादा संक्रामक है। ज्यादा बीमारी पैदा करने वाला है या क्या यह ज्यादा रोग जनक है। इस तरह की चीजें जीनोमिक सर्विलांस के महत्व को दर्शाती हैं। उन्होंने सलाह दी कि हम तब तक यह आश्वस्त नहीं हो सकते हैं कि चारों तरफ कौन सा वेरिएंट है और किसी स्तर का संक्रमण इसकी वजह से हो रहा है। यह तब तक पता नहीं चल पाएगा जब तक कि इसकी वजह से व्यापक प्रकोप नहीं फैल जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में टेस्टिंग, वैक्सीन लगवाने और संक्रमण की वजह का पता लगाने की क्षमता में काफी कमी आ गई है।

क्या फिर लगाना होगा कोरोना प्रतिबंध?
वैज्ञानिकों ने कहा कि इसका मतलब यह है कि अगर दुनिया में यह कोविड का घातक वेरिएंट बढ़ता है तो हम उसके लिए तैयार नहीं होंगे। ऐसे में इस वेरिएंट से बचने के हमें एक और सख्त प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है। ऑक्सफर्ड वेरिएंट की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में टेस्टिंग की दर साल 2022 की शुरुआत में गिरकर 1000 लोगों पर 613 हो गई थी जो अब बहुत ही कम हो गई है। दुनिया में अब तक 5 अरब लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है। ये टीका कुछ ही महीने में संक्रमण को रोकने में कारगर है। हालांकि अभी भी 30 फीसदी लोग कोरोना की वैक्सीन से महरूम हैं।


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