भारत में मुसलमान बाई चांस नही, बाई च्वाइस इंडियन हैं- मौलाना मदनी

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भारत में मुसलमान बाई चांस नही, बाई च्वाइस इंडियन हैं- मौलाना मदनी

-अखिलेश के जिन्ना का नाम लेने पर बोले- बेवकूफी है, किसी पार्टी को हराने के लिए वोट ना करें मुस्लिम

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/लखनऊ/शिव कुमार यादव/- उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही सियासी ाजनीति भी पूरी तरह से गर्मा गई है। राजनीतिक पार्टियों के मुखिया जातिगत समीकरण से लेकर धार्मिक समीकरण तक को अपने अनुरूप करने के लिए सारी हदे पार कर रहे हैं। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मुसलमानों को प्रसन्न करने के लिए जिन्ना के नाम का एक नया शब्दबाण छोड़ा है। जिसपर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने तिखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसे बेवकूफी करार दिया है। उन्होने कहा कि भारत का मुस्लिम आजादी से पहले ही जिन्ना को खारिज कर चुका है। भारत में मुसलामन बाई चांस नही बाई च्वाइस इंडियन है। साथ ही उन्होने मुस्लिमों से अपील की है कि वो किसी पार्टी को हराने के लिए वोट न करें।

प्रेस से मिलिए एक कार्यक्रम में मदनी से जब सवाल किया गया कि मुस्लिम इस बार अखिलेश यादव के लिए वोट करेंगे और जिन्ना का नाम लेने का फायदा होगा?

इस पर मदनी ने कहा, ’’कभी नहीं हो सकता है। भारत में रहने वाला मुसलमान बाय चांस इंडियन नहीं है, बाय चॉइस इंडियन है, जिन्ना को तो सन 1942, 1946 व 1947 में भारतीय मुसलमानों ने खारिज किया।’’अखिलेश ने जिन्ना का नाम क्यों लिया? इसके जवाब में मदनी ने कहा, ’’यह तो वह बताएंगे, आडवाणी जी ने क्यों लिया था, यशवंत सिन्हा ने क्यों लिया था, या फिर अखिलेश क्यों लिया ये ही बताएंगे।’’

जब उनसे पूछा गया कि आखिर अखिलेश ने ऐसा क्यों किया तो मदनी ने कहा, ’’मोटी तौर पर बात यह है कि यह बेवकूफी है, हमारा जिन्ना से कोई लेनादेना नहीं है, जिन्ना साहब में कुछ अच्छाइयां भी होंगी, लेकिन हमारे लिए तो बेकार हैं ना वो, वो तो कुल्हाड़ी मारकर चले गए। उनका हमसे क्या लेना देना है। अखिलेश यादव एक स्वतंत्र राजनीतिक पार्टी के नेता हैं, हो सकता है उन्हें उनकी कोई बात अच्छी लगती हो, वे करें, लेकिन इससे मुसलमान को क्यों जोड़ा जा रहा है। मुझे इस पर भी ऐतराज है। बहुत से लोगों की तारीफ कर सकते हैं, आजकल लोग गोडसे साहब की तारीफ कर रहे हैं। मैंने गोडसे को भी साहब कहा क्योंकि सबके नाम के साथ लगाता हूं।’’ आजादी के इतने सालों बाद भी मुस्लिमों की यह हालत क्यों है? इसके जवाब पर मौलाना ने कहा कि मुसलमानों को किसी एक पार्टी को हराने के लिए नहीं जाना चाहिए, भले ही जिताने के लिए आएं। यह मंशा नहीं होनी चाहिए कि इनको हर हाल में हराना है। जितवाने के लिए हम किसी के साथ आ सकते हैं। इस मुल्क में जितना क्रीमी लेयर था भारत में, वह भारतीय मुस्लिम को छोड़कर पाकिस्तान चला गया था। यहां तो गरीब लोग रह गए थे, जिन लोगों ने 75 सालों में हासिल किया है, वह बहुत खूबसूरत दास्तां है, उसे छिपाकर रखने की जरूरत नहीं है। शुक्रिया अदा करना चाहिए उस प्लैटफॉर्म का जो इस मुल्क ने दिया। भारत का मुसलमान इस उपमहाद्वीप के मुसलमानों से किसी तरह से कम नहीं, ज्यादा ही है। उन्होंने कहा कि कुछ खास मकसद से कुछ खास दलों ने मुसलमानों को बदनाम किया जो गलत है।

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