भारतीय ज्ञान परंपरा से ही 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य संभव—विशेषज्ञों का मत

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September 30, 2026

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-रामानुजन के गणित को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल करने की मांग                                      -एसजीटीयू में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

गुरुग्राम/उमा सक्सेना/-    हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी में महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की गणितीय विरासत और उसके आधुनिक शिक्षा व शोध पर प्रभाव को केंद्र में रखते हुए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। “रामानुजन की विरासत: भविष्य की पीढ़ियों के लिए गणित और उससे आगे की प्रेरणा” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने भाग लेते हुए रामानुजन के गणितीय योगदान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वक्ताओं का मानना था कि भारतीय ज्ञान परंपरा की शक्ति के बल पर ही भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और विश्व गुरु की भूमिका निभाने का लक्ष्य हासिल कर सकता है। सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति हेमंत वर्मा के नेतृत्व में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास तथा एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के सहयोग से किया गया, जबकि इसका मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राम बहादुर राय ने किया। 

कार्यक्रम के दौरान अनीता शर्मा ने अपने संबोधन में रामानुजन के जीवन, उनके शोध और गणित में उनके असाधारण योगदान का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सूत्रों और सिद्धांतों पर आज भी विश्वभर में शोध कार्य हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रामानुजन की प्रसिद्ध ‘लॉस्ट नोटबुक’ में हजारों गणितीय सूत्र दर्ज थे, जिन्हें खोजने और दुनिया के सामने लाने में जॉर्ज ई. एंड्रयूज़ और ब्रूस सी. बर्न्ट की अहम भूमिका रही। सम्मेलन में पंकज मित्तल, अशोक कुमार अग्रवाल, अशोक कुमार अग्रवाल, श्रीराम चौथाईवाले और राकेश भाटिया सहित कई विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए। 

वक्ताओं ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में भारतीय गणितीय परंपरा और रामानुजन की विश्लेषणात्मक सोच को शामिल किया जाए तो विद्यार्थियों में शोध और नवाचार की नई ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है। कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन की ‘एब्स्ट्रैक्ट बुक’ का औपचारिक लोकार्पण भी किया गया। मुख्य वक्तव्य दिनेश सिंह ने ऑनलाइन माध्यम से देते हुए संख्या सिद्धांत और अभाज्य संख्याओं पर रामानुजन के योगदान को रेखांकित किया तथा छात्रों को गहन अध्ययन और शोध के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई। 

सम्मेलन में गणित के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रतिभा दिखाने वाले दो मेधावी विद्यार्थियों देविका त्रिपाठी और कृषव अग्रवाल को भी सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वैदिक गणित पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, जबकि 40 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुतियों को स्वीकृति दी गई और 10 आमंत्रित व्याख्यान तथा एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे।

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