बांग्लादेश में मीडिया पर बढ़ता दबाव, एक और टीवी चैनल को मिली आगजनी की धमकी

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March 7, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-ढाका में स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला

बांग्लादेश/नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशें तेज होती जा रही हैं। हाल के महीनों में स्वतंत्र मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कई दफ्तरों में आगजनी, पत्रकारों पर हमले और खुली धमकियों के बाद अब एक और टीवी चैनल को गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। इस बार निशाने पर हैं बांग्लादेश की वरिष्ठ पत्रकार नाजनीन मुन्नी और उनका संस्थान ग्लोबल टीवी।

48 घंटे में नौकरी से निकालने की धमकी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कट्टरपंथी समूहों ने ग्लोबल टीवी प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर नाजनीन मुन्नी को नौकरी से नहीं हटाया गया, तो चैनल के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया जाएगा। धमकी में पहले से हुए हमलों का हवाला देते हुए डर का माहौल बनाने की कोशिश की गई है।

छात्र संगठन के नाम पर दबाव
बताया जा रहा है कि 21 दिसंबर को कुछ युवक ढाका स्थित ग्लोबल टीवी के दफ्तर पहुंचे और चैनल के प्रबंध निदेशक अहमद हुसैन से मुलाकात की। इन लोगों ने खुद को ‘एंटी डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट’ का सदस्य बताया और नाजनीन मुन्नी को तुरंत हटाने की मांग रखी। उन्होंने धमकी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो चैनल का भी वही हाल होगा, जो पहले प्रोथोम आलो और द डेली स्टार जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों का हुआ था।

राजनीतिक आरोप और पत्रकार का पक्ष
धमकी देने वालों का दावा है कि नाजनीन मुन्नी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की समर्थक हैं। हालांकि नाजनीन मुन्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि यह केवल स्वतंत्र आवाजों को दबाने की एक साजिश है। जिस समय चैनल को धमकी दी गई, उस वक्त वह दफ्तर में मौजूद नहीं थीं।

सोशल मीडिया पर सामने आई सच्चाई
बाद में नाजनीन मुन्नी ने सोशल मीडिया के जरिए पुष्टि की कि ग्लोबल टीवी को धमकी दी गई है। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम उसी डराने-धमकाने के पैटर्न का हिस्सा है, जिसके तहत पत्रकारों को चुप कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जमुना टीवी की संपादक रुखसाना अंजुमन निकोल को भी इसी तरह की धमकियां मिल चुकी हैं।

छात्र संगठन ने झाड़ा पल्ला
इस पूरे मामले पर एंटी डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के अध्यक्ष रिफत राशिद ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य संगठन की अनुमति के बिना चैनल पहुंचे थे और संगठन इस तरह की धमकियों का समर्थन नहीं करता। उनके मुताबिक, संबंधित सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा
मौजूदा हालात में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। देश में बढ़ती अराजकता और हिंसा के बीच स्वतंत्र मीडिया पर लगातार हमले बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत दे रहे हैं। पत्रकारों और मीडिया संस्थानों का मानना है कि अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह कुचल दी जाएगी।

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