प्रेम पच्चीसा( भाग – 6 )

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April 15, 2026

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प्रेम पच्चीसा( भाग – 6 )

बिलासपुर, छत्तीसगढ़/- रोहन और माया स्कूटर संभालते सामने से अचानक, एक तेज रफ्तार से आती कार ने सामने से रास्ता काटा। रोहन ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन सड़क पर बिखरे रेत के कारण स्कूटर फिसल गया। तीनों सड़क पर गिर पड़े। माया ने राशि को कसकर पकड़ रखा था, लेकिन राशि के माथे पर एक गहरा खरोंच लग गया, और वह जोर-जोर से रोने लगी। रोहन के हाथ और घुटने छिल गए, जबकि माया का कंधा थोड़ा चोटिल हुआ। आसपास के लोग दौड़कर आए। एक बुजुर्ग दुकानदार ने तुरंत अपनी दुकान से पानी की बोतल और साफ कपड़ा लाकर राशि के माथे को साफ किया। “जल्दी अस्पताल ले जाओ, बच्ची को टांके लग सकते हैं,” उसने चिंतित स्वर में कहा। रोहन और माया, जो अभी भी सदमे में थे, ने राशि को गोद में उठाया और पास के एक ऑटो में बैठकर नजदीकी अस्पताल की ओर बढ़े।

           अस्पताल में डॉक्टर ने राशि की जांच की। सौभाग्य से, खरोंच गहरी नहीं थी, और टांकों की जरूरत नहीं पड़ी। डॉक्टर ने घाव को साफ करके एक पट्टी बांध दी और कुछ दवाइयां लिखीं। "बच्ची ठीक है, लेकिन अगले कुछ दिन उसे आराम की जरूरत है," डॉक्टर ने कहा। रोहन और माया ने राहत की सांस ली, लेकिन उनकी आंखों में अपराधबोध और डर साफ दिख रहा था।

           घर लौटते समय, माया ने राशि को सीने से लगाए रखा, जबकि रोहन चुपचाप ऑटो की खिड़की से बाहर देख रहा था। उसने माया की ओर देखा और धीरे से कहा, "मुझे और सावधान रहना चाहिए था।" माया ने उसका हाथ थाम लिया और बोली, "ये हम दोनों की गलती नहीं है। अब हमें और सतर्क रहना होगा।"

          उस रात, जब राशि सो गई, रोहन और माया ने आपस में बात की। उन्होंने फैसला किया कि वे अब स्कूटर पर राशि को लेकर नहीं जाएंगे और हमेशा हेलमेट व सेफ्टी गियर का इस्तेमाल करेंगे। यह हादसा उनके लिए एक सबक बन गया, जिसने उन्हें जिंदगी की नाजुकता और अपने परिवार की सुरक्षा का महत्व सिखाया।

           सूर्योदय के पूर्व रोहन अपने किचिन गार्डन में तथागत गौतम बुद्ध की और आँखें बंद करके सोच रहा था कि चलते जीवन में घटनाएं एकाएक कैसे घटती हैं । आदमी बे - खबर लगातार भाग रहा है , कोई रोजी - रोटी के लिए तो किसी को अपनी प्रेम की तलाश है । कोई कुर्सी के लिए मरा जा रहा तो किसी तो किसी को मोक्ष की खोज़ करना है । तथागत भी एक रात यशोधरा और राहुल को छोड़कर जीवन का सच जानने निकल गए थे। उनकी तपस्या को सुजाता की एक प्याली खीर ने ने कैसे नया मोड़ दिया कि गौतम बोले- जीवन पढ़ार्थ है , हर आदमी बीमार होगा, बूढ़ा होकर , मृत्यु को प्राप्त करेगा फिर जीवन से डरने वाली बात क्या है ? बस अत्त दीपो भव ,,,अर्थात हर इंशान को अपना दिआ खुद बनकर जलना होगा ।

         रोहन के गहन चिंतन को माया ने तोड़ दिया- चाय वाला ,,,चाय की प्याली लिए सामने खड़ी पत्नी कि बात सुनकर रोहन मुस्करा दिया । इसी समय रोहन के मोबाईल कि रिंग टोन बजी,,,

राजेन्द्र रंजन गायकवाड़ सेवानिवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक

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