दिल्ली विश्व में सर्वाधिक प्रदुषित राजधानी, देश में औसत वायु प्रदुषण बढ़ा

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दिल्ली विश्व में सर्वाधिक प्रदुषित राजधानी, देश में औसत वायु प्रदुषण बढ़ा

-विश्व के शीर्ष सौ प्रदूषित शहरों में 63 भारत के, अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ रहा प्रदुषण -प्रदुषण पर दिल्ली सरकार के दावे फेल, केंद्र पर भी उठ रही उंगली

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- देश में सरकारी दांवों को ध्वस्त करते हुए दिल्ली लगातार चौथे वर्ष विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी है। हालांकि दिल्ली सरकार दिल्ली को पेरिस व सिंगापुर बनाने का दावा करती रहती है लेकिन दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण ने सरकार की पोल ,खोलकर रख दी है। दिल्ली में 1 साल में करीब 15 फीसदी वायु प्रदूषण बढ़ा है। यह वायु प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के वायु गुणवत्ता मानकों से करीब 20 गुना अधिक पाया गया है। वार्षिक औसत देखे तो पीएम 2.5 का स्तर 96.5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा जबकि मानक 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। इससे सहज ही प्रदुषण के खिलाफ सरकार के काम का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं केंद्र सरकार पर प्रदुषण को नियंत्रित नही कर पाने को लेकर लोग उंगली उठा रहे हैं।
              दिल्ली के साथ-साथ विश्व के 100 शीर्ष प्रदूषित शहरों में 63 अकेले भारत के है। गिरती वायु गुणवत्ता के कारण दिल्ली एक बार फिर विश्व की सर्वाधिक प्रदूषित राजधानी बन गई है। वायु गुणवत्ता तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली स्विस कंपनी आइक्यूएयर की ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट में भारत के शहरों की स्थिति काफी खतरनाक बताई गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के मानकों के आधार पर रिपोर्ट में 117 देशों के 6400 शहरों का अध्ययन करने के बाद वर्ष 2021 के वायु प्रदूषण आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। हालांकि दिल्ली के वायु प्रदुषण को लेकर अब सरकार आंकड़ों का खेल खेल रही है और दिल्ली में 1 साल में बढ़े करीब 15 फीसदी प्रदूषण पर सरकार का कहना है कि पराली के धुएं को दिल्ली में वायु प्रदूषण बनाने के लिए 45 फीसदी जिम्मेदार बताया गया है, वहीं दिल्ली में खराब से गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति वाले दिनों में 2020 की तुलना में 2021 में 21 फीसदी की वृद्धि हुई है। चिंता की बात यह है कि विश्व में 100 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में 63 भारत के हैं। 3 साल लगातार सुधार के बाद भारत में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है और पीएम 2.5 प्रदूषक 58.1 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यह डब्ल्यूएचओ के वायु गुणवत्ता मानक से 10 गुना अधिक है।
                उधर रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में एक भी शहर डब्ल्यूएचओ के मानकों को पूरा नहीं करता। उत्तर भारत के शहरों की स्थिति सबसे खराब है। विश्व में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में दिल्ली चौथे नंबर पर है। राजस्थान का भिवाड़ी सबसे प्रदूषित शहर है। दूसरे नंबर पर गाजियाबाद है। विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित 15 शहरों में से 10 भारत के हैं जिनमें अधिकांश दिल्ली के आसपास है। सर्वाधिक प्रदूषित भारतीय शहरों में आधे से अधिक हरियाणा व उत्तर प्रदेश के शहर है। विश्व के 15 सबसे प्रदूषित शहर भिवाड़ी, गाजियाबाद, होटान-चीन, दिल्ली, जौनपुर, फैसलाबाद-पाकिस्तान, नोएडा, बहावलपुर, पेशावर-पाकिस्तान, बागपत, हिसार, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, रोहतक व लाहौर-पाकिस्तान हैं।
            सरकारी आंकड़ों में भी दिल्ली में स्थिति खराब बताई गई है। संसद में प्रस्तुत एक प्रपत्र के अनुसार दिल्ली में खराब से भी गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति वाले दिन बीते वर्ष 168 रहे जबकि उसके पहले वाले साल में यह संख्या 139 की थी हालांकि 2020 की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में भारत की खराब रैंकिंग को खारिज करते हुए केंद्र सरकार ने कहा था कि यह रिपोर्ट सेटेलाइट व अन्य सेकेंडरी डाटा पर आधारित है जो ठीक नही है।
             शिकागो विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया एयर क्वालिटी लाइव इंडेक्स कहता है कि यदि दिल्ली और लखनऊ में वायु गुणवत्ता सुधार कर डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुरूप हो जाए तो इन शहरों के नागरिकों का जीवन 10 वर्ष तक बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण कम करने को बीते नवंबर में दिल्ली के आसपास कई बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में काम बंद कर दिया गया था। एक आकलन के अनुसार देश को प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष 114 खरब रुपए का नुकसान हो रहा है। स्वास्थ्य पर तो इसका और भी खराब असर है। अनुमान के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण हर मिनट देश में 3 मौत होती है। लोगों में हृदय व फेफड़ों की बीमारी भी बढ़ रही है।

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