नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/वाशिंगटन/भावना शर्मा/- अमेरिका और चीन के बीच चल रहे शीत युद्ध का असर अब दोनो देशों के कारोबार पर भी पड़ने लगा है। ताईवान पर मतभेदों को लेकर यह असर और भी गहराता जा रहा है। जिसे देखते हुए अमेरिकी सरकार चीन में अमेरिकी निवेश को लेकर काफी सतर्क हो गई है। अब एक रिपोर्ट सामने आई हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सरकार एक नया कार्यक्रम तैयार कर रही है जो चीन के कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश को प्रतिबंधित कर सकती है।
शुक्रवार को कैपिटल हिल पर सांसदों को प्रदान की गई रिपोर्ट में, अमेरिकी ट्रेजरी और वाणिज्य विभागों ने कहा कि वे विदेशों में उन्नत प्रौद्योगिकियों में अमेरिकी निवेश को संबोधित करने के लिए एक नई नियामक प्रणाली पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सरकार भविष्य में जोखिमों को देखते हुए अन्य निवेशों के बारे में संभावित रूप से जानकारी एकत्र करने के साथ-साथ कुछ निवेशों पर रोक लगा सकती है। रिपोर्टों में विशिष्ट प्रौद्योगिकी क्षेत्रों का उल्लेख नहीं किया गया था जिन्हें बाइडन प्रशासन जोखिम भरा मानता था।
सांसदों को दी गई रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया था कि द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे क्षेत्र जो प्रतिद्वंद्वियों की सैन्य क्षमताओं को आगे बढ़ा सकते हैं, उसको लेकर नए नियम तैयार किए गए हैं। वहीं अमेरिकी अधिकारी अमेरिकी निवेशकों को चीनी कंपनियों को धन और विशेषज्ञता प्रदान करने से रोकना चाहते हैं जो बीजिंग के सैन्य निर्णयों की गति और सटीकता में सुधार कर सके।
यूएस ट्रेजरी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पूंजी और विशेषज्ञता को उन तरीकों से शोषित होने से रोकने पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो अमेरिकी निवेशकों और व्यवसायों पर अनुचित बोझ न डालते हुए हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। रिपोर्ट में उन देशों के नामों का जिक्र नहीं था जिन्हें नए नियमों के तहत रखा जाएगा। हालांकि, इस मामले से परिचित लोगों को उम्मीद है कि नए नियमों पर बाइडन प्रशासन का काम व्यवहार में काफी हद तक चीन में अमेरिकी निवेश से निपटेगा।


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