नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- करवाचौथ के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री जनसेवा सदन में आज एक विशेष धार्मिक आयोजन का भव्य रूप से आयोजन किया गया, जिसमें सम्मानित अतिथियों के साथ परिवारजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुई, जहां सभी ने आस्था और श्रद्धा के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री निवास में सजी साड़ी और पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित सुहागिनों ने रीति के अनुसार चल रहे व्रत के दौरान चाँद के दर्शन से पूर्व पूरी श्रद्धा के साथ रस्में पूर्ण कीं। पूरे वातावरण में भक्ति, स्नेह और भारतीय संस्कृति की सुगंध व्याप्त दिखाई दी, जिसने इस पर्व को और भी अधिक विशेष एवं यादगार बना दिया।
भारतीय संस्कृति का उत्सव, समर्पण और परिवारिक मूल्यों का संदेश
करवाचौथ का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय दांपत्य जीवन की सुंदरता, एक-दूसरे के प्रति समर्पण और अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। यह त्यौहार उस महान भारतीय संस्कृति का उत्सव है, जिसमें नारी अपने परिवार की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करने की अद्भुत मिसाल पेश करती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा कहा गया कि हमारी भारतीय परंपराएँ और त्यौहार हमें सदैव यह सीख देते हैं कि पारिवारिक मूल्य और सामाजिक कर्तव्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और इन्हीं के संतुलन में एक समृद्ध समाज का निर्माण संभव है।
समस्त सुहागिनों को शुभकामनाएँ, प्रेम और सम्मान से परिपूर्ण रहे जीवन
कार्यक्रम के समापन पर सभी सुहागिनों को करवाचौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए यह मंगल कामना की गई कि हर दांपत्य जीवन प्रेम, सौभाग्य, सम्मान और आपसी विश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़े।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने भी इस सांस्कृतिक आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि इस प्रकार के पहल न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि नई पीढ़ी को भी इनके महत्व से जोड़ते हैं।


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