एमटीएनएल व बीएसएनएल के विलय की फिर उठी मांग, संचार भवन पर किया प्रदर्शन

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एमटीएनएल व बीएसएनएल के विलय की फिर उठी मांग, संचार भवन पर किया प्रदर्शन

-कर्मियों, अधिकारियों ने विलय के साथ रखी आठ सूत्रीय मांगें

नई दिल्ली/- सरकार ने बीएसएनएल को सहारा देते हुए 1.64 लाख करोड़ का पैकेज दिया है। इसके साथ ही एकबार फिर बीएसएनएल व एमटीएनएल के विलय की मांग जोर पकड़ रही है। शनिवार को बीएसएनएल व एमटीएनएल ने संयुक्त रूप से भारत सरकार के संचार भवन पर विशाल प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त हजारों कर्मचारियों, अधिकारियों ने आठ सूत्री मांगों के समर्थन में ज्ञापन भी दिया। प्रदर्शनकारी सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मियों, अधिकारियों को प्रत्येक माह समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने, तीसरा वेज रिविजन 1 जनवरी 2017 से किए जाने और उसे तुरंत लागू करने की मांग की हैं। इसके साथ ही संयुक्त सेवा पेंशन धारकों का पेंशन पुनरीक्षण जल्द से जल्द किया जाए व पेंशन लाभ के लिए कैजुअल सेवा काल की गणना भी की जाए। फोरम ऑफ एमटीएनएल यूनियन एसोसिएशन के संयोजक धर्मराज सिंह ने बताया की इन मांगों के साथ ही सरकार से मांग की गई है कि सेवानिवृत्ति लाभ के लिए 30 फीसदी कॉरपस फंड का गठन किया जाए और एक जनवरी 2018 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों अधिकारियों को भी 5 परसेंट मर्जर का लाभ दिया जाए। धर्मराज सिंह ने बताया कि कैबिनेट के फैसले के मुताबिक बीएसएनएल और एमटीएनएल का विलय किया जाए और मान्यता प्राप्त यूनियन के साथ वार्ता कर सभी पहलू सही किए जाएं। फोरम के चेयरमैन, जनरल सेक्रेटरी वीके तोमर ने कहा कि एमटीएनएल में डेपुटेशन पर आए अधिकारियों को भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ दिया जाए। वीके तोमर ने कहा कि विडंबना यह कि सरकार के 69 हजार करोड़ के रिवाइवल पैकेज के बावजूद दूरसंचार विभाग के अधिकारी और निगम प्रबंधन एमटीएनएल की मौजूदा स्थिति के लिए अपनी असफलता में जवाबदेही का ठीकरा कर्मचारियों पर पढ़ रहे हैं जो सरासर अन्याय पूर्ण हैं। प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के गिरीश आर्य, श्रमिक नेता सुनील कुमार, आरके मुदगिल आदि भी शामिल हुए।

वहीं दूसरी तरफ बीएसएनएल में एमटीएनएल व बीबीएनएल के विलय को लेकर कुछ विरोध के स्वर भी सामने आ रहे हैं। तीनों के विलय पर कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि या विलय नुकसानदायक साबित हो सकता है। जबकि केंद्र सरकार की योजना सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनल में महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) का विलय करने की है। इस संबंध में भारत संचार निगम लिमेटेड की कर्मचारी यूनियन ने बुधवार को प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजा है। बीएसएनएल कर्मचारी यूनियन के महासचिव पी. अभिमन्यू की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सरकार का यह फैसला कंपनी और इसके कर्मचारियों के लिए नुकसानदायक साबित होगा।

कर्ज का टेकओवर करे सरकार

यूनियन ने पीएम से अपील की है कि बीएसएनएल में एमटीएनएल के विलय प्रस्ताव को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं। साथ ही यह सुझाव दिया है कि एमटीएनएल के 26,000 करोड़ रुपये के कर्ज का सरकार टेकओवर कर ले। इसके अलावा बीएसएनएल को भी सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।‘विलय के बाद बीएसएनएल को संभालना होगा मुश्किल’बीएसएनएल के सीएमडी पीके पुरवार ने इसी हफ्ते एक इंटरव्यू में कहा था कि एमटीएनएल आईसीयू में है। किसी भी दिन उसकी मौत हो सकती है। बीएसएनएल कर्मचारी यूनियन के महासचिव पी. अभिमन्यू ने अपने पत्र में इस इंटरव्यू का भी जिक्र करते हुए कहा है कि बीएसएनएल सीएमडी ने कंपनी की आर्थिक स्थिति के बारे में कोई जिक्र नहीं किया है। विलय के बाद बीएसएनएल उस स्थिति में पहुंच जाएगी जहां से उसे संभालना मुश्किल होगा जबकि सरकार का मानना है कि तीनों कंपनियों की बैलेंस शीट मिलाने के बाद ही उन्हें बचाया जा सकता है।

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