एकनाथ शिंदे गुट ने आदित्य ठाकरे समेत शिवसेना के 16 विधायकों को अयोग्य करार देने की मांग की

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एकनाथ शिंदे गुट ने आदित्य ठाकरे समेत शिवसेना के 16 विधायकों को अयोग्य करार देने की मांग की

- महाराष्ट्र विधानसभा में शिव सेना का अंदरूनी कलह और बढ़ा, एकनाथ शिंदे सरकार ने उद्धव ठाकरे को दिया एक और झटका

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/मुंबई/मानसी शर्मा/- महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर की सियासी खींचतान नहीं थम रही है। स्पीकर के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद एकनाथ शिंदे गुट ने आदित्य ठाकरे समेत शिवसेना के 16 विधायकों को अयोग्य करार देने की मांग की है। शिंदे गुट के चीफ व्हिप भारत गोगावाले ने नए स्पीकर राहुल नार्वेकर को लेटर सौंपा है।
              लेटर में कहा है कि 16 विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है। इसलिए इनकी सदस्यता रद्द हो। स्पीकर ने उनके लेटर को ले लिया है और उस पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, शिवसेना भी शिंदे गुट के बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। बागी गुट के 16 विधायकों की सदस्यता का मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में है। हालांकि महाराष्ट्र में शिंदे गुट ने स्पीकर चुनाव में जीत हासिल की है। फिर भी उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट की राहत पर टिकी है। अगर गुट के 16 बागी अयोग्य घोषित हुए तो सरकार का तख्ता पलट सकता है। उद्धव सरकार को गिराने के बाद एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में पहला शक्ति परीक्षण जीत लिया है। भाजपा के राहुल नार्वेकर विधानसभा के नए स्पीकर चुने गए हैं। नार्वेकर को 164 वोट, जबकि शिवसेना के राजन साल्वी को 107 वोट मिले। वोटिंग के दौरान एनसीपी के 7 और कांग्रेस के 2 विधायक गायब रहे।
             विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्ष की मांग पर डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने विधायकों की गिनती शुरू कराई। विधानसभा में अभी 287 विधायक हैं और जीत के लिए 144 का मैजिक फिगर चाहिए था। हालांकि, वोटिंग में सिर्फ 275 विधायकों ने भाग लिया। स्पीकर चुनाव में नवाब मलिक (एनसीपी), अनिल देशमुख (एनसीपी), मुक्ता तिलक (भाजपा), लक्ष्मण जगताप (भाजपा), प्रणित शिंदे (कांग्रेस), दत्ता भरणे (एनसीपी), निलेश लंके (एनसीपी), अण्णा बनसोडे (एनसीपी), दिलीप मोहिते (एनसीपी), बबन शिंदे (एनसीपी), मुफ्ती इस्माइल शाह (एआईएमआईएम) और रणजीत कांबले (कांग्रेस) ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

सुनील प्रभु ने कहा कि शिवसेना के व्हिप का उल्लंघन कर अध्यक्ष पद के चुनाव में 39 शिवसेना के बागी विधायकों ने वोट किया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सपा विधायक अबु आजमी और उनके सहयोगी विधायक ने वोट नहीं दिया। औरंगाबाद के नाम बदलने से वे नाराज थे।
विधानसभा कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है। इसके लिए 9 कैमरे लगाए गए हैं। एक कैमरा का फोकस सीधे विधानसभा अध्यक्ष के चेयर पर रखा गया है।
               बता दें कि राहुल नार्वेकर 2014 से पहले शिवसेना में थे, लेकिन लोकसभा का टिकट नहीं मिला, तो पार्टी छोड़ एनसीपी में शामिल हो गए। 2014 में मवाल लोकसभा सीट से मैदान में उतरे, लेकिन हार मिली। फिर नार्वेकर भाजपा में शामिल हो गए। 2016 में गवर्नर कोटे से नार्वेकर विधानपरिषद पहुंचे। वहीं 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कोलाबा विधानसभा सीट से जीत हासिल की। राहुल नार्वेकर को भाजपा गठबंधन के 106, शिवसेना के 39 और निर्दलीय 19 विधायकों का वोट मिला है।

विधानसभा के भीतर भाजपा के विधायकों ने जय भवानी, जय शिवाजी और जय श्री राम के नारे लगाए, जबकि विपक्षी विधायकों ने वोटिंग के समय ईडी-ईडी के नारे लगाए। स्पीकर चुनाव पर एनसीपी के जयंत पाटील ने कहा कि अभी चुनाव कराया जा रहा है, लेकिन हम कब से मांग कर रहे थे। अब समझ आया कि क्यों नहीं इलेक्शन क्यों नहीं कराया जा रहा था।
             शिवसेना में मचे घमासान को देखते हुए विधानसभा के भीतर उसका दफ्तर सील कर दिया गया। उद्धव ठाकरे की ओर से सुनील प्रभु और एकनाथ शिंदे की ओर से भारत गोगावाले ने व्हिप जारी किया था। उद्धव ठाकरे के समर्थन में 17 शिवसेना के विधायकों ने वोट किया है।

1. संजय राउत – शतरंज में वजीर और जिंदगी में जमीर अगर मर जाए तो समझो खेल खत्म। हमारा वजीर और जमीर अभी जिंदा है। हम बचेंगे भी और लड़ेंगे भी।

2. शरद पवार- मैंने कई बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, लेकिन आज तक किसी भी राज्यपाल ने मुझे मिठाई नहीं खिलाई। मैंने महाराष्ट्र राजभवन में पहली बार ऐसा देखा है।
              शिवसेना ने मुखपत्र सामना के लेख में देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है। इसमें कहा गया है कि शिंदे मुख्यमंत्री बने और उनके मंत्रिमंडल में देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी ब्ड का पद स्वीकार करना पड़ा यही असली भूकंप है। आगे लिखा- फडणवीस फिर आए लेकिन वे इस तरह से ‘आधे’ आएंगे, ऐसा किसी को नहीं लगा था। अब राज्य में क्या होगा?
              20 जून को एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के करीब 20 विधायक सूरत निकल गए, जिसके बाद इन विधायकों को गुवाहाटी ले जाया गया। विधायक गुवाहाटी में करीब 6 दिन रहे। इसके बाद शिंदे गुट ने 39 विधायक साथ होने का दावा कर दिया।
               वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री भी हुई, जिसके बाद कोर्ट ने 11 जुलाई को सुनवाई करने की बात कही है। राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश के बाद उद्धव ठाकरे ने 29 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था ।

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