अनीशा चौहान/- भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने वाले अंतरिक्ष यात्री और उत्तर प्रदेश के लाल, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को राज्य सरकार ने स्टेट गेस्ट का दर्जा प्रदान किया है। यह सम्मान उन्हें ऐतिहासिक एक्सियॉम-4 मिशन की सफलता के बाद दिया गया है, जिसके तहत उन्होंने 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर भारत और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए। सरकार ने न केवल उन्हें सम्मानित किया है बल्कि उनकी सुरक्षा और प्रोटोकॉल को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

स्टेट गेस्ट का दर्जा और कड़ी सुरक्षा
उत्तर प्रदेश सरकार ने शुभांशु शुक्ला को लखनऊ स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में ठहराया है। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है, जो उनकी हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। उनके आवागमन के लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से विशेष एस्कॉर्ट वाहन की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि शुभांशु शुक्ला बिना पूर्व सूचना और प्रोटोकॉल के कहीं भी नहीं जा सकेंगे।
हालांकि उनके घर जाने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन फिलहाल प्रशासन ने उनके गृह क्षेत्र की संकरी गलियों और वहां संभावित भीड़ को देखते हुए उनके घर जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। प्रशासन का मानना है कि इससे कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है।
शुभांशु शुक्ला का ऐतिहासिक मिशन
शुभांशु शुक्ला ने 25 जून को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी और 26 जून को ISS पहुंचे। इस मिशन के दौरान उन्होंने 18 दिनों तक कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें भारत के लिए सात विशेष माइक्रोग्रैविटी प्रयोग भी शामिल थे। ये प्रयोग भविष्य के गगनयान मिशन और भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना में अहम भूमिका निभाएंगे।
उनकी सुरक्षित वापसी 15 जुलाई को कैलिफोर्निया तट पर प्रशांत महासागर में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान के स्प्लैशडाउन के साथ हुई। इसके बाद 17 अगस्त को भारत लौटने पर दिल्ली हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनका स्वागत किया।
यूपी सरकार का सम्मान समारोह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुभांशु शुक्ला को राज्य का गौरव बताते हुए कहा कि “आपकी उपलब्धि साहस, समर्पण और विज्ञान के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पूरे उत्तर प्रदेश और भारत के लिए गर्व का क्षण है।” 25 अगस्त को लखनऊ में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तत्वावधान में उनके सम्मान में एक भव्य समारोह आयोजित किया जा रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत को गौरवान्वित करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


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