इस्कॉन व अडाणी के संयुक्त प्रयासों से बनी महाकुंभ की सबसे बड़ी रसोई

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इस्कॉन व अडाणी के संयुक्त प्रयासों से बनी महाकुंभ की सबसे बड़ी रसोई

—प्रयागराज के डीएसए ग्राउंड में मात्र 10 दिनों में स्थापित की गई यह रसोई —प्रतिदिन 3 लाख तीर्थयात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था —गोवर्धन देसी घी में पकाया जा रहा है पूरा भोजन —इस्कॉन व अडाणी का भक्ति और सेवा का एक असाधारण प्रदर्शन —महाकुंभ में भोजन सेवा में इस्कॉन का एक नया मानदंड स्थापित

अनीशा चौहान/- प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 में लाखों श्रद्धालुओं की सेवा के लिए इस्कॉन और अडाणी ने मिलकर एक अद्वितीय पहल की है। इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर खुसरो पार्क के पास डीएसए ग्राउंड में महाकुंभ की सबसे बड़ी रसोई, जिसे मेगाकिचन कहा जाता है, स्थापित की है। इस रसोई में प्रतिदिन 3 लाख तीर्थयात्रियों के लिए भोजन पकाया जा रहा है, और खास बात यह है कि पूरा भोजन गोवर्धन देसी घी में पकाया जा रहा है। इस रसोई से तैयार किए गए महाप्रसाद को महाकुंभ के 40 विभिन्न केंद्रों पर वितरित किया जाता है।

इस महाकुंभ रसोई के निर्माण और संचालन में इस्कॉन द्वारका से जुड़े अंकित जैन और राम किशोर प्रभु ने शानदार नेतृत्व किया है। इनकी बेहतर योजना और समर्पण ने बड़े पैमाने पर भोजन सेवा के लिए एक नया मानदंड स्थापित किया है।

विशाल रसोई का संचालन और प्रबंधन
इस मेगाकिचन का उद्देश्य खास तौर पर उन श्रद्धालुओं की सेवा करना है, जो पवित्र स्नान के बाद अपनी ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। प्रयागराज प्रशासन ने इस पहल की आवश्यकता को समझते हुए इसकी सफल स्थापना में सहयोग किया।

रसोई में विशाल बरतनों की सुविधा है, जिससे भोजन पकाने और परोसने की प्रक्रिया में कोई समस्या नहीं आती। इसके अलावा, यहां पांच सितारा होटल के शेफ भी शामिल हैं, जो अब इस्कॉन के भक्त बन चुके हैं। इन शेफ्स ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी अपनी किचन क्षमताओं का प्रदर्शन किया था, जब उन्होंने दिल्ली के द्वारका में मात्र 7 दिनों में विश्वस्तरीय रसोई स्थापित की थी, जिसमें प्रतिदिन 5 लाख से अधिक भोजन वितरित किया गया था।

आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग
इस मेगाकिचन में आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया है, जिसमें स्वचालित रोटी बनाने वाली मशीनें शामिल हैं, जो प्रति घंटे हजारों रोटियां बना सकती हैं। इस रसोई में पारंपरिक लकड़ी से जलने वाले स्टोव का भी उपयोग किया जाता है, जिससे प्रसाद का प्रामाणिक स्वाद और सुगंध बरकरार रहती है।

प्रबंधन और संचालन
इस्कॉन और अडाणी की महाकुंभ रसोई के संचालन में कई बड़े मैनेजमेंट स्कूलों के दिग्गजों और पेशेवरों का सहयोग लिया गया है। नारसी मुंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) के कुलपति डॉ. रमेश भट्ट प्रसादम वितरण की रसद की देखरेख कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बड़े पैमाने पर संचालन सुचारू और कुशल हो। इसके साथ ही, आईआईएम अहमदाबाद में भगवद गीता पर पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले प्रो. सुनील माहेश्वरी ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण और प्रबंधन विशेषज्ञता का मिश्रण प्रदान किया है।

स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन
इस रसोई में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जैसे राजमा, छोले, दाल, पूरी, हलवा, इडली, और ढोकला। ये सभी व्यंजन अत्यधिक स्वच्छता और भक्ति के साथ तैयार किए जाते हैं, जिससे तीर्थयात्रियों को एक स्वादिष्ट और संतोषजनक भोजन अनुभव मिलता है। इसके अलावा, तीर्थयात्रियों को तरोताजा और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए हर्बल पेय भी परोसा जाता है, जो यात्रा के दौरान उनकी सेहत का ध्यान रखता है।

समाज सेवा और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण
इस्कॉन और अडाणी की महाकुंभ रसोई एक निस्स्वार्थ मानव सेवा और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। यह रसोई न केवल तीर्थयात्रियों को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन प्रदान कर रही है, बल्कि यह उनके दिलों में प्रेम और देखभाल की भावना भी जगा रही है। इस महान कार्य के माध्यम से, दोनों संस्थाओं ने महाकुंभ के समय में मानवता की सेवा और धार्मिक भक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साकार किया है।

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