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आप विधायक अमानतुल्ला खान को मिली जमानत

-कोर्ट ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़े मामले में दी राहत

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को आप विधायक अमानतुल्ला खान को दिल्ली वक्फ बोर्ड से जुड़े मामले में जमानत दे दी। उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज एक शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में कोर्ट ने राहत दी है। हालांकि अदालत द्वारा समन जारी किए जाने के बाद ही अमानतुल्लाह खान अदालत में पेश हुए थे। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम), दिव्या मल्होत्रा ने उनकी उपस्थिति दर्ज की और उन्हें 15,000 रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर जमानत दे दी।

          बता दें कि ईडी ने हाल ही में दिल्ली वक्फ बोर्ड में नियुक्ति और उसकी संपत्तियों को पट्टे पर देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले में एजेंसी के सामने पेश नहीं होने और जांच में शामिल नहीं होने के लिए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। ईडी की शिकायत पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के अनुपालन में गैर-उपस्थिति के लिए आईपीसी, 1860 की धारा 174, पीएमएलए, 2002 की धारा 63 (4) के साथ पढ़ी गई थी। विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) साइमन बेंजामिन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश हुए।

जांच एजेंसी ने लगाए ये आरोप
संघीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अमानतुल्ला खाम ने अग्रिम जमानत याचिका दायर करके और जांच से भागकर अपनी भूमिका गवाह से आरोपी तक बढ़ा ली है। ईडी के वकील ने आगे कहा कि वे कभी भी उनके खिलाफ जांच पूरी नहीं कर पाए क्योंकि वह एजेंसी के सामने पेश नहीं हो रहे थे। बाकी सभी लोग इस व्यक्ति विशेष के सहयोगी हैं। अधिवक्ता साइमन बेंजामिन ने कहा कि उनकी भूमिका अन्य आरोपियों की तुलना में बहुत बड़ी है, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

जानें क्या है पूरा मामला
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1 मार्च को आप विधायक अमानत उल्लाह खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। यह मामला अमानत उल्लाह खान, जो उस क्षेत्र से मौजूदा विधायक भी हैं, के कथित इशारे पर ओखला क्षेत्र में 36 करोड़ रुपए की संपत्ति की खरीद से संबंधित है। चार आरोपियों और एक फर्म के खिलाफ पहले ही आरोप पत्र दायर किया जा चुका है। आरोप है कि 100 करोड़ रुपए की वक्फ संपत्तियों को गैरकानूनी तरीके से लीज पर दे दिया गया। यह भी आरोप है कि अमानत उल्लाह खान की अध्यक्षता के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड में 32 संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति की गई, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने इसे साजिश बताया और कहा कि केंद्र पार्टी को तोड़ना और दिल्ली सरकार को खत्म करना चाहता है।

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