आखिर दुर्घटना के बाद ही क्यों जागते हैं विभाग, बड़ा सवाल ?

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आखिर दुर्घटना के बाद ही क्यों जागते हैं विभाग, बड़ा सवाल ?

-अगर अवैध निर्माण पर कार्यवाही हो सकती है तो उसके जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्यों नही

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/रणबीर शौकीन/शिव कुमार यादव/- दिल्ली में 13 मई को मुंडका गांव में बहुमंजिला फैक्ट्री में आग लगने से 30 कर्मचारी जलकर मर गए। सुना है इसमें आग बुझाने का कोई उपकरण भी नहीं था और ना ही अग्निशमन विभाग से कोई एनओसी मिली थी। इस बिल्डिंग में और भी कई अनियमितताएं थी। फिर भी बिल्डिंग बनी और मालिक इसे किरायें पर देकर मुनाफा भी कमा रहे थे। अगर हादसा नही होता तो ये सब बाते सामने नही आती। हालांकि पुलिस ने बिल्डिंग मालिक को गिरफ्तार भी कर लिया और उसे बंद भी कर दिया लेकिन सवाल अभी भी वही है कि आखिर अधिकारियों व कर्मचारियों की इतनी अधिका फौज होने के बाद भी सब कुछ कानून के खिलाफ क्यों मिला और ये जो लोग मरे वो भवन की वजह से नही अधिकारियों की वजह से मरे। आखिर ऐसा क्या है कि हमारा प्रशासन हादसे के बाद ही क्यों जागता है अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझते तो यह भवन ही नही बनता और ना लोग मरते। लेकिन भवन मालिक के खिलाफ तो कार्यवाही हो गई तो फिर इस अवैध निर्माण व सुरक्षा खामियों के लिए जो जिम्मेदार अधिकारी थे उनके खिलाफ कार्यवाही क्यां नही हुई। यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब किसी के पास नही है क्योंकि इस हमाम में सब नंगे है। अर्थात् दिल्ली में भ्रष्टाचार की देन बना अवैध निर्माण अधिकारियों की काली कमाई का बड़ा हिस्सा और इसमें क्या पुलिस, क्या निगम, क्या दिल्ली सरकार और क्या नेता सभी लूट रहे है। फिर चाहे कोई मरे या जिऐ उन्हे क्या। उन्हे तो अपने हिस्से से मतलब है।
               देश में एक अजब सा चलन चला हुआ है जब कहीं भी कोई भी कार्यवाही होती है या कोई हादसा होता है तो उसका प्रभाव हर तरफ  दिखाई देता है। अब बुलडोजर को ही ले लो। यूपी से शुरू हुआ बुलडोजर अभियान दिल्ली में भी आ पंहुचा। दिल्ली में भी अवैध निर्माण के नाम पर गरीबों के मकान तोड़ दिये गये। यह सही भी है कि अगर कोई चीज कानून के खिलाफ है तो उसे तोड़ना या हटाना भी ठीक है। लेकिन आज तक एक विषय पर किसी ने नही सोचा की आखिर ये अवैध निर्माण हुए तो क्यों हुए। क्या वहां अधिकारी या प्रशासन नही था या फिर उनकी मिली भगत से हुए। आखिर इन अवैध निर्माणों को रूकवाने की जिम्मेदारी किसकी थी। देश की यही विडंबना है कि हम चोर को तो पकड़ रहे है लेकिन चोर की मां अर्थात् जो चोरो को जन्म दे रही है उसके खिलाफ कार्यवाही नही कर रहे है। अगर यूं ही चला तो चोर तो पैदा होते रहेंगे और चोरी भी होती रहेगी और चोरों के खिलाफ कार्यवाही भी होगी लेकिन चोर की मां हमेशा अपना काम करती रहेगी। इसलिए चोर के साथ-साथ चोर की मां के खिलाफ उससे दुगुनी कार्यवाही जब तक नही होगी तब तक न चोरी रूकेगी और न चोर।
                 इसी प्रकार नजफगढ़ जोन में भी पिछले वर्ष सुरखपुर रोड, गोपाल नगर, नजफगढ़ में बुलडोजर से गरीबों के सैकड़ों मकान तोड़ दिए गए। उस समय मकान मालिक चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे कि हमारे से भवन विभाग व पुलिस विभाग के अधिकारी पैसे लेकर गए थे। उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। ऐसा नहीं है कि इन भ्रष्ट जेई के खिलाफ कोई शिकायत नहीं हुई है। पिछले वर्ष नजफगढ़ भवन विभाग के जेई राजेंद्र मीणा और बीके मीणा के खिलाफ अनेकों शिकायतें की गई थी। ये अधिकारी पहले अवैध निर्माण मालिक को कार्यवाही के नाम पर एक नोटिस देकर फिर पैसे लेकर अवैध निर्माण करवाते रहे हैं। यदि यह सच्चाई देखनी है तो इनके द्वारा कितने नोटिस दिए गए हैं और उन नोटिस दी गई प्रॉपर्टीओं पर कितने मकान बनाए गए हैं इसकी जांच होनी चाहिए। ऐसे भ्रष्ट जेई के खिलाफ विभाग अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की बजाय केवल इनका तबादला कर दिया जाता है और एक खास बात और है कि कुछ महीने या वर्ष के बाद यह फिर नजफगढ़ जोन में आ जाते हैं। इनकी शाहदरा जोन व दूसरे जोन में बदली नहीं की जाती है। यदि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तो न केवल अवैध निर्माण रुक जाएगा बल्कि बुलडोजर चलाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। अनेकों बार भवन विभाग के जेई के विरुद्ध आरटीआई लगाकर भी अवैध निर्माण के बारे में पूछा गया है परंतु यह इन आरटीआई का कोई उचित जवाब न देकर टालमटोल की जाती है। नजफगढ़ जोन में अधिकारी द्वारा आरटीआई का मजाक उड़ाया जा रहा है। आरटीआई लगाने वाले जो प्रश्न पूछते हैं उनका पूर्णतया कोई जवाब नहीं दिया जाता है। आखिर आरटीआई लगाने वाले थक हार कर बैठ जाते हैं। इसी कारण नजफगढ़ में भ्रष्टाचार का यह खेल सरेआम चल रहा है।

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