अर्ध सैनिक आधे-अधूरे, पैंशन एवं सुविधाओं के नाम पर रह गये ठगे से

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  
February 22, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

अर्ध सैनिक आधे-अधूरे, पैंशन एवं सुविधाओं के नाम पर रह गये ठगे से

-जब खतरा एक जैसा है तो फिर सुविधाओं में अंतर क्यों
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- भारतीय सेना के लिए अच्छी खबर कि अब केंद्रीय सुरक्षा बलों की तर्ज पर रिस्क व हार्डशिप अलाउंस रिवाइज किया जाएगा जोकि पुलवामा हमले के बाद गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के कारण पैदा हो गया था। उपरोक्त ऐतिहासिक घोषणा माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी द्वारा सेना कमांडर कांफ्रेंस के दौरान की गई।
               कॉनफैडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन महासचिव रणबीर सिंह ने माननीय रक्षामंत्री के ऐलान का स्वागत करते हुए कहा कि इस निर्णय के बाद सेना व अर्धसेना के बीच रिस्क व हार्डशिप अलाउंस के तहत मिलने वाले भत्तों की खाई को दूर किया जा सकेगा बल्कि जवानों की कार्य क्षमता में वृद्धि के साथ ही वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
               रणबीर सिंह आगे कहते हैं कि सेना और अर्धसैनिक बलों का खतरा एक जैसा तो पैरामिलिट्री जवानों की पैंशन बंद क्यों की गई, क्या कभी किसी मान्यवर मंत्री जी द्वारा पैंशन बहाली का मुद्दा उठाया। क्या एमएसपी की तर्ज पर पैरामिलिट्री सर्विस पे देने का ऐलान किया था उसको इम्पलीमैंट किया गया। क्या अर्ध सैनिक बलों के सैकंड इन कमांड को सेना के लेफ्टीनेंट कर्नल के बराबर वेतन देने हेतु ऐलान हुआ वो पुरा किया गया जोकि हमारे सैक्ंड कमांडिंग से 20 फीसदी ज्यादा वेतन भत्ते पाते हैं यही हाल युनिट की कमान करने वाले पैरामिलिट्री कमांडेंट का है सेना कर्नल के निस्बत। क्या माननीय राजनाथ सिंह जी के गृहमंत्री रहते उन्होंने मरहूम अरूण जेटली जी तब के वित्त मंत्री को सीपीसी कैंटीन पर 50 फीसदी जीएसटी माफी के लिए चिट्ठी लिखी जोकि आज रद्दी टोकरी में चली गई ओर उपर वोकल पे लोकल कर दिया गया क्या कैंटीन पर जीएसटी टैक्स में छूट मिली जिसके कारण 20 लाख पैरामिलिट्री परिवारों का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है। क्या आईटीबीपी के हिमवीरों सियाचिन अलाउंस की तर्ज 42500 भत्ता नहीं मिलना चाहिए चाहिए जोकि समस्त बर्फिले हिमालय की चीन से सटी सीमा लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम व अरूणांचल प्रदेश तक चाक चौबंद चौकीदारी कर रहे हैं। पैरा मिलिट्री जवानों को मिलने वाले राशन मनी भत्तों पर टैक्स देना पड़ता है जबकि भारतीय सेना में ऐसा नहीं है।
                 महासचिव रणबीर सिंह ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 7 सालों में श्री राजनाथ जी केंद्रीय रक्षा मंत्री से 5 बार मुलाकात कर उपर लिखित जायज भलाई संबंधित मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपे गए, केंद्रीय गृह सचिव से मुलाकात की गई। माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से संसद भवन में मुलाकात कर ज्ञापन दिया गया। गृह राज्यमंत्री श्री नित्यानंद राय जी 5 बार मुलाकात कर गुहार लगाई गई। महामहिम राष्ट्रपति जी से मुलाकात कर कम से कम राज्यों में सैनिक कल्याण बोर्ड की तर्ज पर अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड के गठन व सेना झंडा दिवस कोष की तर्ज पर अर्धसेना झंडा दिवस कोष की स्थापना की गुहार लगाई गई ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌जिसमे किसी बड़े बजट की जरूरत नहीं है। क्या केंद्रीय सुरक्षा बलों के महानिदेशक पदों पर कैडर आफिसर्स नहीं होने चाहिए जो कि जवानों के दुख दर्द, आपरेशन में साथ साथ रहता है हर होने वाली कठिनाईयों को बेहतर समझते हैं बजाय जबरदस्ती थोंपे गए आईपीएस अधिकारियों के।
                  जब खतरा एक जैसा है तो मिलने वाली सुविधाओं में फासले क्यूं। अब तो वर्दी का रंग भी एक जैसा कॉम्बैट कर दिया गया। वास्तविक सरहदी चौकीदारों को उनके हकों से वंचित किया जा रहा है। पैरामिलिट्री फोर्सेस में पिछले सालों में कम छुट्टियों के चलते ओर घर परिवारों से हजारों किलोमीटर दूर आत्महत्याओं व आपसी शूटआऊट के मामलों में वृद्धि हुई है। लगता है कि माननीय गृह मंत्री जी का 100 दिन छुट्टी वाला फार्मूला फेल हो गया है। दरअसल पुरे भारत की कानून व्यवस्था बनाए रखने, बाढ भुकंप से आम जान माल की सुरक्षा, बेमौसम चुनावों में ड्यूटी की अधिकता, सरहदों की सुरक्षा करते करते जवानों की नींदें हराम हो गई। उपर से 100 दिन छुट्टी की फाइल जब डीजी सीआरपीएफ द्वारा गृह मंत्रालय को प्रपोजल भेजा गया तो सिविलियन फोर्सेस का बचकाना खिताब से नवाजा जाना लाजिमी है कि जवानों के मौराल पर असर पड़ेगा।  
अर्ध नग्न, अर्ध चंद्रमा, अर्ध व्यास, अर्ध विराम, अर्ध कुंवारी जैसे अनेकों शब्द जिनमें बू का आभास होता है ओर इसी कड़ी में एक और नाम अर्ध-सैनिक ठगा सा सुविधाओं से महरूम, बाजार भाव पर निर्भर एनपीएस पैंशन व्यवस्था।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox