मानसी शर्मा /- संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने कमर कस ली है। पुलिस अब पत्थरबाजों और हिंसा फैलानेवालों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। बता दें कि पुलिस संभल हिंसा के दौरान पत्थरबाजी करनेवालों के पोस्टर सार्वजनिक स्थलों पर लगाएगी। साथ ही जुर्माना भी वसूला जाएगा। इसके अलावा पुलिस हिंसा में शामिल आरोपियों की धड़-पकड़ भी कर रही है।
पुलिस का एक्शन जारी
संभल हिंसा को लेकर पुलिस ने अभी तक 12 एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 100 पत्थरबाजों की पहचान की गई है। पुलिस ने संभल के सांसद के जियाउररहमान बर्क पर एफआईआर दर्ज की है। बर्क पर भड़काऊ बयान देकर हिंसा फैलाने का आरोप लगा है। साथ ही पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि दंगाई को भी हो ब्ख्शा नहीं जाएगा। वहीं, जो उपद्रवी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम का ऐलान किया जाएगा।
संभल में क्यों हुई हिंसा?
गौरतलब है कि संभल की अदालत ने जामा मस्जिद का सर्वे का आदेश दिया था। जिसके बाद सर्वेक्षण टीम 19 नवंबर को सर्वे करने पहुंची थी लेकिन, उस दिन कोई पत्थरबाजी नहीं हुई थी। वहीं, 24 नवंबर को भी सर्वेक्षण टीम सुबह सात बजे से मस्जिद का सर्वे कर रही थी। उस दौरान हिंसक भीड़ ने पुलिस के ऊपर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके अलावा एसपी, सीओ समेत कई पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए थे।
हिंसा पर बयानबाजी शुरू
संभल हिंसा को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने संभल हिंसा को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही पुलिस की मंशा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ओवैसी ने पुलिस गोलीबारी सवाल उठाते हुए कहा कि हिंसा हुई, तीन मुसलमानों को गोली मार दी गई। हम इसकी निंदा करते हैं। यह गोलीबारी नहीं बल्कि हत्या है।


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