अब दिल्ली के जीके थाने में स्थानीय लोग करेंगे आने वाले केसों का फैसला

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 4, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

अब दिल्ली के जीके थाने में स्थानीय लोग करेंगे आने वाले केसों का फैसला

-जीके थाने में दिल्ली पुलिस की अहम योजना लागू, स्थानीय व्यक्ति बनेगा ’पुलिस अफसर’

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली पुलिस ने अब दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 यानी जीके थाने में आने वाले केसों का फैसला स्थानीय लोग करेंगे। इसके लिए जीके थाने में अब हर रोज एक टुडे पब्लिक पुलिस ऑफिसर नियुक्त किया जाएगा। ये ऑफिसर स्थानीय नागरिक होगा। सुनने में ये भले ही अटपटा लगे, लेकिन ये हकीकत में होने जा रहा है।
           पुलिस का मानना है कि स्थानीय लोगों को स्थानीय नागरिक ही काउंसलिंग कर समस्याओं का समाधान कर सकता है। ऐसे में दर्ज होने वाले छोटे-मोटे केस थाना स्तर पर ही खत्म हो जाएंगे। इससे दिल्ली पुलिस पर केसों को बोझ कम होगा और लोगों को सुगमता से न्याय मिल सकेगा। इलाके की आरडब्ल्यूए जीके थाना पुलिस का पूरा सहयोग कर रही हैं।  
          दिल्ली पुलिस मुख्यालय में बैठने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-एक थाने में ये प्रयोग करीब एक वर्ष से चल रहा था। अब इस स्कीम को जल्द ही लागू करने की तैयारी है। इस स्कीम का नाम टुडे पब्लिक पुलिस ऑफिसर(टीपीपीओ) है। इसके तहत जीके-एक थाने में हर रोज एक टीपीपीओ नियुक्त किया जाएगा। ये टीपीपीओ ग्रेटर कैलाश थाने में घुसते ही डीओ रूम के पास स्थित रिसेप्शनिस्ट के बगल में बैठेगा। दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कई बार खास हाई सोसाइटी के लोग छोटे-छोटे मुद्दे को लेकर केस कराने पुलिस स्टेशन आ जाते हैं और पुलिस अधिकारी के समझाने पर ही वह मानते नहीं है। परिणामस्वरूप इन मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज करा दी जाती है। इन लोगों को लगता है पुलिस अधिकारी या तो दूसरी पार्टी का पक्ष ले रहें हैं या फिर उनका कोई लोभ है। ऐसे में इन लोगों को स्थानीय आदमी ही बेहतर तरीके से समझा सकता है।  

एक वर्ष से चल रहा है प्रयोग- ग्रेटर कैलाश आरडब्ल्यूए से जुड़ी व सशक्त महिला संघ नामक एनजीओ की अध्यक्ष शार्मिला गोयल ने बताया कि ग्रेटर कैलाश-एक थाने में टीपीपीओ का प्रयोग पिछले एक वर्ष से चल रहा था। वह खुद इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस टीपीपीओ से ये सामने आया है कि पीड़ित स्थानीय लोगों की बातों को अच्छी तरह समझ जाते हैं और छोटे-मोटी बातों पर केस दर्ज कराने वाले काउंसलिंग होने के बाद केस दर्ज नहीं कराते।

पिछले सप्ताह पति-पत्नी का मामला सामने आया था
संघ अध्यक्ष शार्मिला गोयल ने बताया कि पिछले सप्ताह जीके थाने में पति-पत्नी का मामला आया था। ये दंपती एस-ब्लाक में रहते हैं। पति शराब पीने का आदी है। जब वह थाने में आए थे उस समय भी उसने शराब पी रखी थी। पत्नी पति के खिलाफ के शराब पीकर हंगामा करने और गाली देने की एफआईआर दर्ज कराना चाहती थी। उस समय टीपीपीओ ने महिला को समझाया कि एफआईआर कराना कोई स्थायी समाधान नहीं है। पति का इलाज कराना स्थायी समाधान है। ऐसे में महिला मान गई और पति को लेकर वापस घर चली गई।
         टीपीपीओ का उद्देश्य शिकायतकर्ता के साथ सहानुभूति रखना और यह सुनिश्चित करना है कि उनके साथ सावधानी से व्यवहार किया जाए। उन्हें आवश्यक सहायता और निवारण दिया जाए। टीपीपीओ आगंतुक को परामर्श भी प्रदान करेगा और पीड़ित को मानसिक राहत प्रदान करने में पुलिस अधिकारी की सहायता करेगा।- शर्मिला गोयल, सशक्त महिला संघ की अध्यक्ष व आरडब्ल्यूए के सहयोग से बने सीपीआर ट्रस्ट की ट्रस्टी

बनाई जा रही वेब एप्लीकेशन
पुलिस मुख्यालय में बैठने वाले एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्रेटर कैलाश-एक थानाध्यक्ष अजीत सिंह की देखरेख में पुलिस एक वेब एप्लीकेशन बना रही है। इनमें सत्यापन कराकर ड्राइवर, घरेलू सहायक/सहायिका, नर्सिंग सहायक और प्लंबर आदि का प्रोफाइल लेकर डाटा एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद लोग इस वेब एप्लीकेशन से ड्राइवर व नर्सिंग सहायक आदि ले सकते हैं। ऐसे में लोग अनजान लोगों को अपने घर में काम पर नहीं रखेंगे सकेंगे और आपराधिक वारदात होने की संभावना बहुत कम हो जाएगी।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox