नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 49वें सत्र में अक्साई चिन का मामला उठाया गया है। कश्मीरी मानवाधिकार कार्यकर्ता जुनैद कुरैशी ने अक्साई चिन पर बीजिंग के अवैध कब्जे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि अक्साई चिन पर चीन ने कब्जा किया हुआ है. इसलिए उसे औपचारिक रूप से ’चीन के कब्जे वाला जम्मू और कश्मीर’ कहा जाना चाहिए और इस रूप में ही इसे मान्यता दी जानी चाहिए। जुनैद यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक हैं। यहां बता दें कि अक्साई चिन जम्मू और कश्मीर के 20 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है जिसपर चीन का नाजायज कब्जा है।

संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को अक्साई चिन का मुद्दा जोर शोर से उठा। श्रीनगर के जुनैद कुरैशी ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक हैं। जुनैद ने कहा कि मैं अपने पूर्वजों की भूमि जम्मू और कश्मीर के मुद्दे पर परिषद का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा गढ़े गए मुद्दे से संबंधित ज्यादातर शब्दावलियां वर्षों से सामान्य उपयोग में हैं। उपयुक्त शब्दावली विवादित मामले को परिभाषित करने और उसके समाधान की राह तलाशने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जुनैद कुरैशी ने कहा, ’’अक्साई चिन जम्मू और कश्मीर के 20 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका आकार लगभग भूटान के आकार के बराबर है। संयुक्त राष्ट्र और उसके विभिन्न अंगों ने अक्साई चिन पर चीन के अवैध कब्जे की पूरी तरह से अनदेखी की है।’’ उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर का मुद्दा जितना गंभीर है, उस लिहाज से इस तरह की चूक का गंभीर प्रभाव पड़ा है। चीन ने जुनैद की इस मांग का विरोध किया है. और इस बयान को चीन की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ बताया है।
यहां बता दें कि 1950 के दशक के दौरान चीन ने अक्साई चिन के लगभग 38,000 वर्ग किमी क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान इस क्षेत्र पर बीजिंग ने सैन्य पकड़ मजबूत कर ली।
हाल ही में संसद में भारतीय जनता पार्टी के सांसद जामयांग नामग्याल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और अक्साई चिन के लिए प्रतीकात्मक बजट पेश करने की मांग की थी। उन्होंने लोकसभा में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के बजट और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए यह मांग उठाई थी।


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