अवैध कालोनी में डेमोलेशन कर प्रशासन ने दिया भूमाफियाओ को कड़ा संदेश

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December 7, 2022

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अवैध कालोनी में डेमोलेशन कर प्रशासन ने दिया भूमाफियाओ को कड़ा संदेश

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- नजफगढ़ में अवैध कालोनियों को लेकर वीरवार को सुरखपुर रोड पर साउथ वेस्ट डी एम राहुल सिंह के नेतृत्व में अवैध कॉलोनी में तोड़फोड़ की बड़ी कार्रवाई की गई। प्रशासन की तोड़फोड़ की कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। इस दौरान कालोनी के लोगों की व प्रशासनिक कर्मचारियों व अधिकारियों की आपस में झड़प भी हो गई जिसमें नजफगढ़ तहसील के कानूनगो गंभीर रूप से घायल हो गए और सिविल डिफेंस के करीब 10 कर्मचारी भी लोगों के गुस्से का शिकार बने। वहीं लोगों ने एसडीएम की गाड़ी का भी शीशा तोड़ दिया। इसके साथ ही मकान टूटने के डर से एक बुजुर्ग को हार्टअटैक का दौरा पड़ गया जिससे उसकी हालत भी चिंताजनक बनी हुई है हालांकि पुलिस ने मामला बिगड़ते देख सूझबूझ से मामले को शांत कर दिया और स्थिति ज्यादा बिगड़ने से बचा ली। वही लोगों के गुस्से को देख कर डीएम व एसडीएम मौके से कर्मचारियों को संघर्ष में छोड़कर गायब हो गए। हालांकि प्रशासन ने अपनी कार्यवाही से भूमाफियांओं को कड़ा संदेश दिया है और यह भी साबित करने की कोशिश की है कि अब तक जो हो रहा था वो अब नही होगा और वास्तव में कार्यवाही होगी।


गौरतलब है कि नजफगढ़ वह मटियाला विधान सभाओं में पिछले काफी समय से अवैध कालोनियां बसाने का काम जोरो से चला हुआ है जिसमें प्रशासन की मिलीभगत का आरोप लोग बार-बार लगाते रहे हैं लेकिन फिर भी अभी तक जिन कालोनियों में प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्यवाही की है वह मात्र खानापूर्ति रही है जिससे भू माफिया व प्रशासन के गठजोड़ की कहानी उजागर होती रही है। लेकिन वीरवार को साउथवेस्ट डीएम राहुल सिंह ने एसडीएम नजफगढ़ विनय कौशिक, तहसीलदार सुभाष यादव व कानूनगो राकेश कुमार के साथ-साथ एस एच ओ बाबा हरिदास नगर व उनकी टीम तथा सिविल डिफेंस के कर्मचारियों के साथ सुरखपुर रोड पर अवैध कॉलोनी में डेमोलेशन की कार्यवाही की। हैबतपुरा रेवेन्यू इस्टेट की जमीन में कटी इस कॉलोनी के करीब 20 घरों को जेसीबी ने जमींदोज कर दिया। तोड़फोड़ की कार्यवाही के दौरान जब प्रशासन ने कॉलोनी में बने हुए मकानों को तोड़ने की कार्यवाही शुरू की तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा और देखते ही देखते मामला संघर्ष में बदल गया। लोगों ने नजफगढ़ कानूनगो राकेश कुमार व सिविल डिफेंस के कर्मचारियों के साथ हाथापाई की इसी दौरान कॉलोनी में पथराव भी शुरू हो गया और एक पत्थर कानूनगो राकेश कुमार को भी लगा जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ लोगों ने एसडीएम की गाड़ी को भी अपना निशाना बनाया और उसके भी शीशे तोड़ दिये। संघर्ष बढ़ता देख पुलिस हरकत में आई और उन्होंने लोगों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया।

वही एसएचओ जगतार सिंह ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और मामले को गंभीर रूप धारण करने से रोक लिया। इस संबंध में जब एसडीएम व डीएम से बात करने की कोशिश की गई तो दोनों मौके से चले गए। वही कॉलोनी वासियों का कहना है कि प्रशासन ने बगैर नोटिस दिए उनके मकानों को तोड़ने की कार्यवाही की है जिससे उनका काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन को इस नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि नजफगढ़ में इतनी कालोनियां कट रही हैं जिनमें आज तक प्रशासन ने किसी भी मकान को नहीं तोड़ा है जबकि उनकी यह कॉलोनी काफी पुरानी है और सरकार ने जो अवैध कालोनियों के लिए नियमितीकरण की अवधि व नियम तय किये है उसमें हमारी कॉलोनी आती है लेकिन फिर भी प्रशासन ने यह कार्यवाही कर स्वयं कानून का उल्लंघन किया है जिसके लिए लोग कोर्ट जाएंगे और डीएम व एसडीएम के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेंगे। कॉलोनी में अधिकतर ऐसे मकान तोड़े गए हैं जो ऐसे लोगों के हैं जिन्होंने बड़ी मुश्किल से अपने पूरे जीवन की जोड़ी पाई-पाई से अपने बच्चों को एक छत देने की कोशिश की थी लेकिन प्रशासन के मनमाने रवैया से वह छत भी उनसे छीन गई है। लोगों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने उन्हें घर से सामान निकालने तक का समय नहीं दिया। कुछ घरों के अंदर तो बच्चे वह महिलाएं होते हुए भी प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्यवाही जारी रखी जिससे कई लोगों को चोट भी लगी है। लोग प्रशासन की इस कार्यवाही के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं लेकिन पुलिस उनकी शिकायत नहीं ले रही है जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। आज की तोड़फोड़ की कार्यवाही में झड़प के दौरान घायल हुए अधिकारी वह कर्मचारियों के मामले को देखते हुए लोगों को शंका है कि प्रशासन इस मामले में उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई के रूप में फिर तोड़फोड़ की कार्रवाई करेगा। वहीं पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पुलिस कितने लोगों के खिलाफ कार्यवाही करेगी। इस संघर्ष में घायल कानूनगो को ऑर्थोप्लस अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे वेंकटेश्वर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। पुलिस के अनुसार कानूनगो राकेश कुमार की हालत स्थिर बताई जा रही है।

वही मकान टूटने के डर से बुजुर्ग प्रताप सिंह को आए हार्टअटैक से पुलिस उसे खतरे से बाहर बता रही है। हालांकि नजफगढ़ में अवैध कालोनियों को लेकर भू माफिया, पुलिस निगम, रेवेन्यू विभाग की मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं लेकिन जब भी प्रशासन इस तरह की कार्यवाही करता है तो लोग उस कार्यवाही का ना केवल विरोध करते हैं बल्कि प्रशासन पर पैसे लेने का और मांगने का आरोप भी लगाते है। लोगों का कहना है कि बगैर प्रशासन की मिलीभगत के इस तरह की कालोनियां बसाई ही नहीं जा सकती और इसका शिकार वह गरीब लोग होते हैं जिनके पास सिर छुपाने के लिए भी जगह नहीं होती जो कुछ भी वह जीवन पर्यंत कमाते हैं वह इन अवैध कालोनियों में घर के लिए लुटा देते हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए कि इतनी सख्ती के बावजूद भी किस तरह से अवैध कालोनियां काटी जा रही हैं जिससे पर्यावरण व लोग तबाह हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को जिस कालोनी से पैसा नही मिलता वहां अधिकारी इस तरह की कार्यवाही करते है ताकि और कालोनियां काटने वाले भूमाफियां से पैसा ऐंठ सके। इस काम में पूर्व एसडीएम व तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। जिनके खिलाफ लोग कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।

एसडीएम विनय कौशिक ने बताया कि यह कार्यवाही एसटीएफ ने की है। इन कालोनियों के खिलाफ पहले एसडीएम कार्यवाही के आदेश देकर गये थे। ऐसी और भी कालोनियां जिनके खिलाफ कार्यवाही होनी है। उन्होने कहा कि पुलिस इस मामले में छुपाछुपी का खेल खेलती रही जिसकारण हमारा एक अधिकारी लोगों के गुस्से का शिकार हो गया। उन्होने कहा कि घटना से 15 मिनट पहले ही कानूनगो की एक एसआई से कहा सुनी हो गई थी। उन्होने एसआई को लोगों को भड़काने के लिए टोका था। उन्हे लगता है कि पुलिस ने रेवेन्यू विभाग का साथ ना देकर जनता को भड़काने का काम किया। एसडीएम ने बताया कि विभाग पुलिस की कार्यशैली को लेकर इसकी जांच की मांग करेगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग करेगा।

एसडीएम विनय कौशिक

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