धार्मिक कट्टर पंथी छोड़ सऊदी अरब बड़े नागरिक बदलावों की ओर

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धार्मिक कट्टर पंथी छोड़ सऊदी अरब बड़े नागरिक बदलावों की ओर

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/ देश-विदेश /नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- विश्व के तेजी से बदलते परिवेश में सऊदी अरब में भी बड़ी तेजी से बदलाव की बयार बह रही है। सऊदी अरब धीरे-धीरे धार्मिक कट्टरता को छोड़कर कुछ नियमों में आमूल चूल बदलाव कर चुका है। पहले सऊदी अरब ने अपराधियों को कोड़े मारने की सजा पर रोक लगाई और अब किंग सलमान ने नाबालिगों के किसी भी जूर्म चाहे वह संगीन ही क्यो न हो उन्हे सजा-ए-मौत नही देने का फरमान जारी कर दिया है।
                                               पिछले कुछ समय से सऊदी अरब में बदलाव की बयार बह चली है. अपराधियों को कोड़े मारने की सजा पर रोक लगाने के बाद सऊदी अरब के किंग सलमान ने अब नाबालिगों के किसी भी संगीन जुर्म पर उन्‍हें सजा-ए-मौत नहीं देने का फरमान जारी किया है। किंग सलमान के बेटे और क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के वैचारिक प्रभाव के चलते सऊदी अरब में रविवार को कट्टर इस्लामिक दंड प्रावधानों में बदलाव किया गया। किंग सलमान के इस नए फरमान से देश का नजरिया अपराधो व अपराधियों को लेकर काफी बदल गया है। हालांकि हालिया इस बदलाव से यह माना जा रहा है कि देश के अल्पसंख्यक शिया समुदाय के कम से कम छह नाबालिग युवकों की मौत की सजा खत्म हो जाएगी। यह सभी 18 साल से कम उम्र के हैं और उन पर सियासत की खिलाफत करने का इलजाम है।
                                              सऊदी सरकार के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अब्वाद अल्वाद ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह राजशाही की और आधुनिक दंड संहिता है. यह सऊदी राजशाही के और सुधारवादी कदम उठाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है. अपने देश में कुछ घरेलू विरोध के बीच क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान वैश्विक स्तर पर सऊदी अरब की छवि में सुधार लाने की कोशिश की है. ताकि सऊदी अरब को आधुनिक बनाते हुए यहां विदेशी निवेश के अवसर खोले जा सकें. हालांकि इसी के साथ उन पर उदारवादियों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं, लेखकों और सुधारवादी उलेमा के दमन के भी आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2018 में सऊदी अरब के जमाल खशोगी की हत्या सऊदी क्राउन प्रिंस के लिए काम करने वाले तुर्की के एजेंटों ने कर दी थी. इस घटना की विश्व भर में कड़ी आलोचना हुई थी. सऊदी अरब के आला अफसरों की ओर से जारी बयान के अनुसार सऊदी अरब की अदालतों के जजों ने सजा देने के इस्लामिक तौर-तरीकों में विगत शनिवार को ही बदलाव करते हुए दंडस्वरूप शारीरिक यातनाएं देने की मनाही का एलान किया था. इसके बदले में अब अपराधियों को जेल में कैद, जुर्माना या सामुदायिक सेवाएं जैसे ही दंड दिए जा सकेंगे।

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