नई शिक्षा नीति से निजी स्कूल और कॉलेज मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

December 2022
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
December 2, 2022

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नई शिक्षा नीति से निजी स्कूल और कॉलेज मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति में क्या खास होगा इस पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि इस नीति पर भारत का भविष्य निर्भर करता है। इसीलिए सूक्ष्म अध्ययन की जरूरत थी। जनता, शिक्षाविदों, राज्य सरकारों व केंद्र सरकार के मंत्रालयों से सुझाव लिए गए। सितंबर 2019 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की विशेष बैठक हुई। जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 26 शिक्षा मंत्रियों ने भाग लिया। 7 नवंबर, 2019 को संसद की स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुति भी दी गई। साथ ही उन्होने कहा कि देश में शिक्षा के नाम पर निजी स्कूलों व कालेजों ने जो लूट मचा रखी थी अब नई शिक्षा नीति से इस पर पूरी तरह से रोक लग जायेगी।
उन्होने कहा कि नई शिक्षा नीति में स्पष्ट कर दिया गया है कि कौन संस्थान किस कोर्स की कितनी फीस रख सकता है। अधिकतम फीस भी तय होगी। फीस के संबंध में ये नियम उच्च व स्कूली शिक्षा दोनों पर ही समान रूप से लागू होंगे। प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के संस्थान इस नियम के दायरे में होंगे। यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के विलय होने से उच्च शिक्षा में कितना बदलाव आएगा। उच्चतर शिक्षा की प्रोन्नति हेतु एक व्यापक सर्वसमावेशी अम्ब्रेला निकाय होगा जिसके तहत मानक स्थापन, वित्तपोषण, प्रत्यायन व विनियम के लिए स्वतंत्र इकाइयां बनेंगी। यह निकाय प्रौद्योगिकी से फेसलेस विनियमन का काम करेगा। उसके पास मानकों पर न चलने वाले निजी या सरकारी संस्थानों पर कार्रवाई करने की शक्तियां होंगी।
श्री पोखरियाल ने कहा कि स्कूली शिक्षा के लिए ज्यादातर आपत्तियां फंडिंग से संबंधित थी। जैसे कि मिड-डे मील के साथ-साथ सुबह के नाश्ते के लिए फंडिंग कैसे होगी। उच्च शिक्षा मामले में ज्यादातर आपत्तियां मान्यता को लेकर थीं। चूंकि शिक्षा समवर्ती सूची का हिस्सा है इसलिए हम कोई भी सुझाव राज्यों के साथ विचार करके ही लागू करेंगे। यह शिक्षा नीति केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा में निवेश को बढ़ाने का समर्थन करती है। इसे जीडीपी के 6 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
उन्होने कहा कि मुख्य रूप से निवेश में पर्याप्त वृद्धि और नई पहल के साथ 3-6 वर्ष के बीच के सभी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा तय करना है। मेरे लिए पांच प्रमुख बातों में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम, स्कूली शिक्षा के लिए 100ः नामांकन अनुपात प्राप्त करना, लॉ और मेडिकल एजुकेशन के अलावा समूची उच्च शिक्षा के लिए सिंगल रेगुलेटर, विज्ञान, कला, मानविकी, गणित और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए एकीकृत शिक्षा और वर्ष 2025 तक 50ः छात्रों को वोकेशनल शिक्षा प्रदान करना शामिल हैं। इनमें भी सबसे महत्वपूर्ण मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम है। अभी यदि कोई छात्र छह सेमेस्टर इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद किसी कारण से आगे की पढाई नहीं कर पाता है तो उसको कुछ भी नहीं मिलता। अब एक साल के बाद पढाई छोड़ने पर सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा व तीन-चार साल के बाद पढ़ाई छोड़ने के बाद डिग्री मिल जाएगी। देश में ड्रॉप आउट रेश्यो कम कम करने में इसकी बड़ी भूमिका होगी। प्रस्तावित शिक्षा नीति से देश में रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा व रटकर पढ़ने की संस्कृति खत्म होगी।
इस नीति के माध्यम से 2030 तक स्कूल शिक्षा में 100 प्रतिशल सकल नामांकन के लक्ष्य को प्राप्त किया जाना है। इससे 3-6 वर्ष आयु वर्ग के 3 करोड़ 5 लाख से अधिक बच्चों को लाभ होगा। 2025 तक नेशनल मिशन के माध्यम से फाउंडेशनल लर्निंग एंड न्यूमेरिस स्किल से 12 करोड़ प्राथमिक स्कूलों के छात्र लाभान्वित होंगे। कोशिश है कि हर बच्चा कम से कम एक स्किल में विशेषज्ञता लेकर स्कूल से निकले।
नई शिक्षा नीति तय करेगी कि हमारे छात्र नौकरी मांगने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे। एक स्वायत्त निकाय बनाया जाएगा। जो शिक्षा के सभी स्तरों में प्रौद्योगिकी का उपयुक्त एकीकरण करेगा। क्यूएस व टीएचई जैसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग की कसौटी कितने विदेशी संकाय व विदेशी छात्र उस संस्थान में हैं, उस पर भी निर्भर करती है। भारतीय संस्थान उस कसौटी पर शायद उतना आगे नहीं है। यही कारण है कि हम अपनी रैंकिंग पद्धति एनआईआरएफ लाए।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox