दिल्ली सरकार की इजाजत के बगैर फीस नहीं बढ़ा पाएंगे निजी स्कूल मनीष सिसोदिया ने दिया आदेश

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दिल्ली सरकार की इजाजत के बगैर फीस नहीं बढ़ा पाएंगे निजी स्कूल मनीष सिसोदिया ने दिया आदेश

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- दिल्ली में कोरोना वायरस के कारण हुए लाॅक डाउन में निजी स्कूल मनमानी पर उतर आये है जिसे देखते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिए निर्देश जारी करते हुए कहा कि कोई भी निजी स्कूल बगैर सरकार की इजाजत के फीस नही बढ़ा सकेगा। फिर भी कोई स्कूल फीस बढ़ाता है या बच्चों से दूसरे चार्ज लेता है या उसके खिलाफ को शिकायत मिलती है तो दिल्ली सरकार उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेगी।
                                                 कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली सरकार काफी सतर्कता से काम ले रही है। शुक्रवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया मीडिया से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लाइव हुए। उन्होंने कहा, कोरोना की वजह से शिक्षा और अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। सरकार को कई जगह से शिकायत मिल रही है कि कुछ निजी स्कूल बढ़ा-चढ़ाकर फीस ले रहे हैं। सरकार से बिना इजाजत लिए फीस बढ़ा रहे हैं। कई जगह से शिकायत मिल रही है कि स्कूल एनुअल चार्ज व ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी ले रहे हैं जबकि इस समय कोई ट्रांसपोर्ट तो चल ही नहीं रहा और एक नहीं तीन-तीन महीने की फीस मांग रहे हैं। इस पर मनीष सिसोदिया ने कहा, यह भी शिकायत मिल रही है कि जो बच्चे स्कूल की फीस नहीं दे रहे उनकी ऑनलाइन क्लास बंद करा दी गई है। स्कूल चैरिटेबल संस्था द्वारा चलते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आदेश दिया है कि किसी भी प्राइवेट स्कूल को वह चाहे सरकारी जमीन पर चल रहा है या गैर सरकारी पर चल रहा हो उसको ऐसे समय में फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सरकार से पूछे बिना कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकता फिर चाहे वह किसी भी तरह का स्कूल हो।
                                    उपमुख्यमंत्री ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि कोई भी स्कूल 3 महीने की फीस नहीं मांगेगा। सिर्फ एक महीने की फीस मांगी जाएगी। बच्चों को जो ऑनलाइन एज्युकेशन दी जा रही है, वह सभी बच्चों को देनी होगी। अगर कोई पेरेंट्स फीस नहीं दे पा रहा है तो उनके बच्चों का नाम ऑनलाइन टीचिंग से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई भी स्कूल ट्रांसपोर्टेशन फीस नहीं ले सकता। कोई भी स्कूल एक महीने की ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं ले सकता। सभी प्राइवेट स्कूलों की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अपने सभी स्टाफ को समय पर वेतन देंगे। पैसे की कमी की वजह से किसी स्टाफ की सैलरी कोई स्कूल नहीं रोकेगा। सरकारी आदेश के बावजूद भी किसी भी स्कूल के खिलाफ शिकायत मिली तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी। हालांकि शिक्षा मंत्री ने अपने आदेश जारी कर स्कूलों को सचेत कर दिया लेकिन इस संबंध में स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि एक स्कूल से कई घरों को रोटी मिलती है। अगर स्कूल फीस ही नही लेेंगे तो कर्मचारियों की तनख्वाह कैसे देंगे। जिस ट्रांसपोर्टेशन की शिक्षा मंत्री बात कर रहे है उनकी भी स्कूलों बैंक में लोन की किस्त भरनी होती है और स्कूलों का सारा खर्च सिर्फ फीस पर ही निर्भर करता है। अगर सरकार चाहती है कि स्कूल फीस न ले और न बढ़ायें तो सरकार को भी कुछ त्याग करना चाहिए और स्कूलों की मदद के उपाय करने चाहिए।

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