अमेरिकी चुनाव में पहली बार हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रवाद रहा चर्चा में

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 25, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

अमेरिकी चुनाव में पहली बार हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रवाद रहा चर्चा में

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेरिकी चुनाव में हिंदुत्व और हिंदू राष्ट्रवाद भी चर्चा में रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इसका एक कारण यह है कि अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों का प्रभाव बढ़ा है। अपनी बढ़ी समृद्धि के कारण भारतीय समुदाय के लोग राजनीतिक चंदा देने वाले महत्त्वपूर्ण समुदायों में शामिल हो गए हैं।
इसके अलावा पिछले कुछ सालों में इस समुदाय को राजनीतिक रूप से गोलबंद करने की कोशिशें भी हुई हैं, जिसका असर अब दिख रहा है। अमेरिका में लगभग 44 लाख भारतीय मूल के लोग हैं, जिनमें से तकरीबन 19 लाख मतदाता हैं। ऐसी मान्यता है कि कुछ राज्यों में जहां चुनावी नतीजों का फैसला मामूली अंतर से होता है, वहां भारतीय समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में हो सकते हैं। मगर भारतीय समुदाय में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर इस बार गहरा विभाजन भी देखने को मिला है। मसलन, कैलिफोर्निया राज्य से प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) के सदस्य रो (रोहित) खन्ना इस बार जब दोबारा चुनाव मैदान में उतरे हैं, तो हिंदुत्व समर्थक भारतीयों का धड़ा उनका विरोध कर रहा है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के रो खन्ना हिंदू हैं, लेकिन हिंदू समुदाय के एक धड़े का मानना है कि उन्होंने हिंदुत्व के खिलाफ काम किया है और भारत की छवि बिगाड़ने में वे सहायक बने हैं। खन्ना कश्मीर और भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के कथित हनन आदि जैसे मुद्दों पर भारत सरकार के रुख के मुखर आलोचक रहे हैं। ऐसी ही स्थिति वॉशिंगटन राज्य से प्रतिनिधि सभा की डेमोक्रेटिक सदस्य प्रमिला जयपाल की रही है।  
हाल में पिउ रिसर्च के एक सर्वे से सामने आया था कि 72 फीसदी भारतीय मूल के मतदाता डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बिडेन का समर्थन कर रहे हैं। इस सर्वे के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 22 फीसदी भारतीय-अमेरिकियों का ही समर्थन हासिल है। लेकिन अमेरिकन फॉर हिंदूज, विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका, हिंदू स्वयंसेवक संघ, ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन जैसे संगठन हिंदुत्व समर्थक हिंदू प्रत्याशियों के लिए चंदा और समर्थन जुटाने में लगे रहे हैं। इनमें से ज्यादातर का झुकाव डोनाल्ड ट्रंप की तरफ है।
इन्हीं संगठनों की मेहनत के कारण पिछले साल ह्यूस्टन में हुई ‘हाउडी मोदी’ रैली में 50 हजार से ज्यादा लोग जुटे थे। वहां ट्रंप भी आए थे। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चुनाव में लगे अबकी बार ट्रंप सरकार का जिक्र करते हुए सांकेतिक रूप में ट्रंप के प्रति अपने लगाव को व्यक्त किया था। जानकारों का मानना है कि उसका असर हुआ। पहले दूसरे अल्पसंख्यकों की तरह भारतीय समुदाय का विशाल बहुमत भी डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देता था। इस बार इसमें सेंध लगी है। हालांकि इसका बहुत ज्यादा प्रभाव हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों रो खन्ना या प्रमिला जयपाल पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वे ऐसे चुनाव क्षेत्रों से उम्मीदवार हैं जहां दूसरे समुदाय के लोग बड़ी संख्या में हैं, फिर भी हिंदुत्ववादी संगठनों ने अपनी उपस्थिति जता दी है। ये संगठन अमेरिकी सियासत और मीडिया में प्रचलित कथित हिंदूफोबिया को दूर करने और कश्मीर, नागरिकता संशोधन कानून और भारत में मुसलमानों पर कथित अत्याचार जैसे मुद्दों पर सक्रिय हैं। वे एक ऐसी लॉबी के रूप में उभरे हैं, जिसे नजरअंदाज करना अब मुश्किल हो गया है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox