किसान यूनियन ने बुराड़ी जाने से किया इनकार, बार्डरों पर ही डटे रहेंगे किसान

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किसान यूनियन ने बुराड़ी जाने से किया इनकार, बार्डरों पर ही डटे रहेंगे किसान

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब हरियाणा के किसानों का आंदोलन रविवार को लगातार चैथे दिन जारी है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आज बैठक के बाद केंद्र सरकार के प्रस्ताव को सिरे से नकार दिया है। किसानों ने स्पष्ट कहा है कि वे
बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि सिंघु बॉर्डर पर ही बैठे रहेंगे। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की ओर से लिखित में बातचीत का न्योता मिलेगा तभी बात बनने की उम्मीद है।
किसान यूनियन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम बुराड़ी नहीं जाएंगे, सरकार बिना शर्त हमसे बात करे। हम अपने साथ चार महीने का राशन अपने साथ लेकर आए हैं। हम चार महीने तर यहां बैठ सकते हैं। किसान नेता ने कहा कि सरकार के प्रस्ताव को हमने नामंजूर दिया है। हम जंतर-मंतर जाना चाहते हैं। बुराड़ी खुली जेल हैं, प्रदर्शन की जगह नहीं है। दो महीने से हम पंजाब में संघर्ष कर रहे हैं। हम अपने मंच से किसी भी राजनीतिक दल को आने की इजाजत नहीं देंगे। 
सरकार द्वारा बातचीत के लिए जो कंडीशन थी हम उसे किसान संगठनों का अपमान मानते हैं। अब हम बुराड़ी पार्क में बिलकुल नहीं जाएंगे। हमें पता चला है कि वो पार्क नहीं ओपन जेल है। हम ओपन जेल में जाने की बजाय 5 मेन मार्ग जाम कर दिल्ली की घेराबंदी करेंगे- दिल्ली, सिंघु बॉर्डर पर किसान नेता
हम कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा अनजाने में मीडिया के साथ हुए दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगना चाहते हैं। भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए, हमने तय किया है कि हर बैठक के बाद, हम मीडिया के लिए एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी करेंगे। हरियाणा, रोहतक से सभी खाप पंचायतों ने आज बैठक में फैसला लिया कि वो तन-मन-धन से देश के किसानों के साथ है। सभी खापें किसानों के सहयोग के लिए कल दिल्ली कूच करेंगी। हमने तय किया है कि हम किसी भी राजनीतिक पार्टी के नेता को अपने मंच पर बोलने की अनुमति नहीं देंगे, चाहे वह कांग्रेस, भाजपा, आप या अन्य दल हों। हमारी समिति अन्य संगठनों को, जो हमारा समर्थन कर रही हैं, बोलने के लिए अनुमति देंगी यदि वे हमारे नियमों का पालन करते हैं।
भारत सरकार किसानों से तीन दौर की वार्ता कर चुकी है, चैथी बार तीन दिसंबर को मिलने का प्रस्ताव दिया था। सरकार हर स्तर पर खुले मन से बातचीत करने को तैयार है पर किसान यूनियन को बातचीत का माहौल बनाना चाहिए। उन्हें आंदोलन का रास्ता छोड़ चर्चा का रास्ता अपनाना चाहिए- केंद्रीय कृषि मंत्री
हम बुराड़ी नहीं जाएंगे। हमारे 30 किसान संगठन सर्वसम्मति से जो भी निर्णय लेंगे उसके बाद हमारे नेता आज इसके बारे में मीडिया को जानकारी देंगे- बलदेव सिंह सिरसा, किसान नेता
किसानों को शक है कि अगर वो बुराड़ी जाएंगे तो जो प्रेशर है वो कम हो जाएगा। उनका ये संदेह सही भी हो सकता और गलत भी। ऐसे में सरकार को अड़ियल रवैया नहीं अपनाना चाहिए। किसानों की मांगें जायज हैं। उनसे बात करके रास्ता निकालना चाहिए। ये बॉर्डर सील नहीं होते अगर हरियाणा सरकार वॉटर कैनन से किसानों को रोकने की कोशिश न करती। सरकार को किसानों के लिए पहले ही जगह निर्धारित कर देनी चाहिए थी। हरियाणा सरकार ने सड़कें खुदवाकर किसान के अहम को चोट पहुंचाने का काम किया- हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा
  हमने फैसला लिया कि सभी बॉर्डर और रोड ऐसे ही ब्लॉक रहेंगे। गृह मंत्री ने शर्त रखी थी कि अगर हम मैदान में धरना देते हैं तो वो तुरंत मीटिंग के लिए बुला लेंगे। हमने शर्त खारिज कर दी है। अगर वो बिना शर्त के मीटिंग के लिए बुलाएंगे तो ही हम जाएंगे- किसान नेता हरमीत सिंह कादियां
 
सिर्फ प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से बातचीत के लिए तैयार हैं किसान
बीते चार दिनों से सिंघु बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान डटे हुए हैं। पहले वे दिल्ली जाना चाह रहे थे, लेकिन रोके जाने के बाद अब उन्होंने एनएच-44 को पूरी तरह जाम कर दिया है। प्रदर्शन में मौजूद किसान नेताओं ने यह साफ कर दिया है कि वे सिर्फ प्रधानमंत्री व गृहमंत्री से बातचीत के लिए तैयार हैं और उसके लिए भी बुलावा लिखित में मिलता है तभी बात होने की उम्मीद है।
किसानों के आंदोलन और गृह मंत्री अमित शाह की शर्तों के बीच दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों से बात करने के लिए किसी तरह की शर्त नहीं होनी चाहिए। जल्द से जल्द बातचीत होनी चाहिए। वो हमारे देश के किसान हैं। वो जहां चाहें वहां उन्हें प्रदर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए।
 
मन की बात में बोले मोदी- किसानों के बंधन समाप्त हुए
प्रधानमंत्री मोदी ने भी रविवार को मन की बात कार्यक्रम में किसानों के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि काफी विचार-विमर्श के बाद भारत की संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया जिनसे न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और नए अवसर भी मिले हैं।

नए कृषि कानूनों को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं आंदोलनरत किसान
लगातार चल रहे किसानों के प्रदर्शन को लेकर नीति आयोग के सदस्य (कृषि) रमेश चंद ने कहा कि आंदोलनकारी किसान नए कृषि कानूनों को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। नए कृषि कानूनों में किसानों की आय को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की क्षमता है। चालू वित्त वर्ष 2020-21 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत से कुछ बेहतर रहेगी।

पैदल दिल्ली की ओर जा रहे यात्री
सिंघु बॉर्डर पर आवाजाही बंद होने के कारण आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई यात्रियों को तो दिल्ली पहुंचने के लिए पैदल ही निकलना पड़ रहा है।
 
टिकरी बॉर्डर पर भी प्रदर्शन जारी
सिंघु और दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर के साथ ही टिकरी बॉर्डर पर भी किसानों का प्रदर्शन जारी है। बुराड़ी के निरंकारी समागम मैदान में प्रदर्शन की अनुमति मिलने के बाद भी किसान सीमाओं पर ही अड़े हुए हैं। इसे देखते हुए टिकरी बॉर्डर पर भी भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
 
हम बॉर्डर पर ही रहेंगे- टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने गाजियाबाद-दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन के दौरान कहा कि जब सारे आंदोलन रामलीला मैदान में होते हैं, तो हम निरंकारी भवन क्यों जाएं। ये विशेष सुविधा हमें क्यों मिल रही है? हम यहीं बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे।
 
शांति से प्रदर्शन कर रहे हैं किसानरू ज्वाइंट सीपी सुरेंद्र यादव
सिंघु बॉर्डर पर तैनात दिल्ली पुलिस के नॉर्थ रेंज के ज्वाइंट सीपी सुरेंद्र यादव ने बताया कि प्रदर्शनकारी किसान शांति से प्रदर्शन कर रहे हैं और अब तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनका सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसानों के आंदोलन के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो।

कानून वापस नहीं लिए जाने तक विरोध जारी रहेगा- टिकैत
मेरठ से दिल्ली कूच कर रहे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यूपी बॉर्डर पर पहुंचने से पहले राजधानी में डेरा डालने का इशारा किया है। उन्होंने कहा कि हमारे बड़े-बुजुर्ग कह रहे हैं इसलिए दिल्ली की 26 जनवरी की परेड जरूर देखेंगे। अबकी किसान दिल्ली में 26 जनवरी और 15 अगस्त सब देखेगा यानी कृषि कानून वापस नहीं लिए जाने तक भाकियू केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जारी रहेगा।

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